Sonbhadra News : कांग्रेस ने निकाला 'विजय जुलूस', शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को बताया छात्रों के संघर्ष की जीत
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आज शाम कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने जिलाध्यक्ष रामराज गोंड व शहर अध्यक्ष हाजी फरीद अहमद के नेतृत्व में नगर के स्वर्ण जयंती चौक से नगर पालिका.....

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9:00 PM, July 25, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आज शाम कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने जिलाध्यक्ष रामराज गोंड व शहर अध्यक्ष हाजी फरीद अहमद के नेतृत्व में नगर के स्वर्ण जयंती चौक से नगर पालिका परिषद स्थित गांधी प्रतिमा तक विजय जुलूस निकाला। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने इसे छात्रों के संघर्ष की जीत करार दिया। वहीं जुलूस के समापन पर छात्रों और युवाओं के बीच मिष्ठान वितरित कर कार्यक्रम का समापन किया गया।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष रामराज सिंह गोंड ने कहा कि "परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं और कांग्रेस पार्टी देश के युवाओं एवं छात्रों के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देश के करोड़ों छात्रों के संघर्ष की जीत है। उन्होंने मांग की कि कथित नीट पेपर लीक प्रकरण से जुड़े आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए, जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए तथा आंदोलनकारी छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं।"
वहीं पीसीसी सदस्य आशुतोष कुमार दुबे ने बताया कि "मैं स्वयं जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन का प्रत्यक्ष साक्षी रहा। छात्रों के साथ कदम से कदम मिलाकर संघर्ष किया और उन पर हुए अत्याचार को अपनी आंखों से देखा। युवाओं के शांतिपूर्ण आंदोलन पर जिस प्रकार का दमन हुआ, वह लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण था। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देश के युवाओं और छात्रों के संघर्ष की जीत है। यह संदेश है कि जब युवा एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाते हैं, तो सत्ता को भी झुकना पड़ता है।"
प्रदेश सचिव ज्ञानेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि "परिवर्तन की असली ताकत हमेशा युवा ही होता है। चाहे घर हो, समाज हो या देश, इतिहास गवाह है कि हर बड़े बदलाव की अगुवाई युवाओं ने ही की है। लगातार पेपर लीक, बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी से परेशान देश के युवाओं ने अब अपने भविष्य की लड़ाई खुद लड़ने का संकल्प लिया है। उन्होंने व्यवस्था से सवाल पूछने और सरकार की नीतियों का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने का फैसला किया है। सरकार को लगा कि जिस तरह उसने पहले किसान आंदोलन सहित विभिन्न आंदोलनों का सामना किया, उसी तरह युवाओं की आवाज को भी दबाया जा सकता है, लेकिन वह युवाओं के जज़्बे को समझने में चूक गई। आज का युवा यह अच्छी तरह जानता था कि यदि वह अपने अधिकारों और भविष्य के लिए संघर्ष नहीं करेगा, तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी प्रभावित होगा। इसलिए देश का युवा पूरी मजबूती के साथ लोकतांत्रिक तरीके से परिवर्तन की अलख जगाने की ठानी। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि आज चुनाव हो तो भाजपा पूरे देश में हार का स्वाद चखेगी।"
महिला सभा जिलाध्यक्ष ऊषा चौबे ने बताया कि "वह तीन दिनों तक जंतर-मंतर पर छात्र-छात्राओं के बीच मौजूद रही। देश के विभिन्न राज्यों से आई छात्राओं ने जिस तरह पुलिसिया कार्यवाही और दुर्व्यवहार का सामना किया, उसने अंग्रेजी शासन की याद ताजा कर दी। महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार किया गया, उनके कपड़े तक फाड़े गए। लोकतांत्रिक देश में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाली छात्राओं के साथ ऐसा व्यवहार बेहद निंदनीय है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।"
वहीं पूर्व जिलाध्यक्ष रमेश देव पाण्डेय ने बताया कि "कांग्रेस के लंबे राजनीतिक सफर में मैंने कई नेताओं का नेतृत्व देखा है, लेकिन राहुल गांधी में युवाओं को जागृत करने और उनके मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की अद्भुत क्षमता है। जिस तरह उन्होंने छात्रों की आवाज को संसद और प्रधानमंत्री आवास तक पहुंचाने के लिए संघर्ष किया, वह उनके मजबूत नेतृत्व का परिचायक है। युवाओं के इस आंदोलन ने देश की राजनीति में एक नई दिशा दी है और भाजपा के खिलाफ जनभावना का स्पष्ट संदेश दिया है।"
जिला उपाध्यक्ष बृजेश तिवारी ने बताया कि "देश का युवा अब जाग चुका है। वह अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना जानता है और अन्याय के खिलाफ चुप रहने वाला नहीं है। छात्रों की एकजुटता और लोकतांत्रिक आंदोलन ने यह साबित कर दिया कि जनशक्ति के आगे सत्ता को भी झुकना पड़ता है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा इसी जनदबाव और युवाओं के संघर्ष का परिणाम है।"
कांग्रेस नेत्री संगीता श्रीवास्तव ने बताया कि "जंतर-मंतर पर छात्रों और विशेषकर छात्राओं के साथ हुई कथित बर्बरता ने देश के इतिहास के काले अध्यायों की याद दिला दी। जिस तरह शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर बल प्रयोग किया गया, उसने लोकतांत्रिक मूल्यों को आहत किया गया उससे जलियांवाला बाग कांड की याद ताजा होगी। देश का युवा अब बदलाव चाहता है और आने वाले समय में युवा इस ईष्ट इंडिया कंपनी से भी अधिक क्रूर सरकार उखाड़ फेकेगी।"
वरिष्ठ कांग्रेसी नेता जगदीश मिश्रा ने कहा कि "केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा यह साबित करता है कि लोकतंत्र में जनता, विशेषकर युवाओं की आवाज सबसे बड़ी ताकत होती है। आज एक बार फिर यह कहावत चरितार्थ हुई कि 'जिस ओर जवानी चलती है, उस ओर जमाना चलता है।' युवाओं के संघर्ष ने दिखा दिया कि लोकतांत्रिक तरीके से लड़ी गई लड़ाई अंततः सफलता तक पहुंचती है।"
कार्यक्रम में प्रदेश सचिव इंजीनियर जितेंद्र पासवान, पूर्व शहर अध्यक्ष राजीव त्रिपाठी, जगदीश मिश्रा, यूथ कांग्रेस जिलाध्यक्ष शशांक मिश्रा, बृजेश तिवारी, आरटीआई प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष श्रीकांत मिश्रा, संगीता श्रीवास्तव, मोहन बियार, आशीष सिंह, राहुल त्रिपाठी, ऊषा चौबे, राजबली पांडे, दयाशंकर पांडे, विशिष्ट कुमार चौबे, बाबूलाल पनिका, तामेश्वर तिवारी, राहुल जैन, आशुतोष कुमार, शीतला पटेल, स्वतंत्र साहनी, मंजू देवी, लाल बहादुर, सूरज वर्मा, रामेश्वर तिवारी, राधेश्याम पटेल, बृहस्पति भारती, अहमद हुसैन, राहुल पटेल, शंकर भारतीय सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।




