Sonbhadra News : उद्देश्य से भटका सम्पूर्ण समाधान दिवस! पहुँची 337 शिकायतें, मौके पर सिर्फ 27 का निस्तारण
शासन की मंशा के अनुरूप जनता की समस्याओं का त्वरित और गुणवत्तापूर्ण समाधान करने के उद्देश्य से सोमवार को जिले की चारों तहसीलों में आयोजित सम्पूर्ण समाधान दिवस अपने मूल उद्देश्य से भटका नजर आया.......

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sonbhadra
5:29 PM, July 6, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• जनसुनवाई बनी औपचारिकता, 310 फरियादियों को फिर मिला इंतजार
• डीएम ने दिए गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निस्तारण के दिए निर्देश
सोनभद्र । शासन की मंशा के अनुरूप जनता की समस्याओं का त्वरित और गुणवत्तापूर्ण समाधान करने के उद्देश्य से सोमवार को जिले की चारों तहसीलों में आयोजित सम्पूर्ण समाधान दिवस अपने मूल उद्देश्य से भटका नजर आया। आंकड़ों पर नजर डालें तो जिलेभर में कुल 337 शिकायतें प्राप्त हुईं, लेकिन मौके पर महज 27 मामलों का ही निस्तारण हो सका यानी 310 शिकायतकर्ता अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर आए, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन और जांच का भरोसा देकर वापस भेज दिया गया।
सबसे अधिक शिकायतें ओबरा तहसील में दर्ज हुईं, जहां जिलाधिकारी चर्चित गौड़ और पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा स्वयं मौजूद रहे। यहां कुल 119 शिकायतें प्राप्त हुईं, लेकिन मौके पर केवल 6 मामलों का निस्तारण हो सका, जबकि 113 प्रकरण लंबित रह गए। अधिकांश शिकायतें भूमि विवाद से संबंधित थीं, जिनके लिए अधिकारियों को मौके पर जांच कर समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
रॉबर्ट्सगंज तहसील में उप जिलाधिकारी अश्वनी कुमार की अध्यक्षता में आयोजित समाधान दिवस में 36 शिकायतें आईं, जिनमें से केवल 6 का निस्तारण किया गया, जबकि 30 मामले लंबित रहे।
घोरावल तहसील में 97 शिकायतों के सापेक्ष मात्र 8 मामलों का समाधान हो सका। वहीं 89 शिकायतें जांच और कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को भेज दी गईं।
इसी तरह दुद्धी तहसील में 85 शिकायतें दर्ज हुईं, लेकिन मौके पर सिर्फ 7 मामलों का निस्तारण किया गया। शेष 78 प्रार्थना पत्रों पर समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
समाधान दिवस के दौरान जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि निस्तारण के बाद शिकायतकर्ताओं से फीडबैक भी लिया जाए, ताकि उन्हें दोबारा कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। साथ ही प्रत्येक प्रकरण की गंभीरता से जांच कर वास्तविक आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए।
हालांकि जमीनी हकीकत सरकारी दावों से अलग दिखाई दी। समाधान दिवस का उद्देश्य फरियादियों की समस्याओं का मौके पर समाधान करना है, लेकिन इस बार भी अधिकांश मामलों में जांच और रिपोर्ट के नाम पर शिकायतों को लंबित कर दिया गया। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब वरिष्ठ अधिकारी स्वयं मौजूद रहने के बावजूद मौके पर केवल आठ प्रतिशत शिकायतों का ही निस्तारण हो पाया, तो आम दिनों में शिकायतों के समाधान की स्थिति क्या होगी।
आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि सम्पूर्ण समाधान दिवस अब त्वरित समाधान का मंच कम और शिकायतें दर्ज कर उन्हें लंबित रखने की औपचारिक प्रक्रिया अधिक बनता जा रहा है, जिससे फरियादियों की उम्मीदें लगातार टूट रही हैं।




