Sonbhadra news : मुख्यमंत्री के गड्ढामुक्त सड़क अभियान को ठेंगा! कुरुहूल माइनर मार्ग की बदहाली ने खोली विकास के दावों की पोल
राबर्ट्सगंज विकास खंड के कुरुहूल माइनर क्षेत्र की बदहाल सड़क व्यवस्था सरकारी दावों को आईना दिखा रही है।

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2:52 PM, October 9, 2026
- त्योहार से पहले सड़कें दुरुस्त करने के निर्देश बेअसर! गड्ढों में भरा पानी, बदहाल रास्ते और हादसों का खतरा; स्कूली बच्चों से लेकर हजारों राहगीरों तक की बढ़ी मुश्किलें
- ग्रामीणों का सवाल—आखिर कब जागेगा जिम्मेदार विभाग? जिलाधिकारी से स्थलीय निरीक्षण कराकर तत्काल मरम्मत कराने की मांग
राकेश चौबे
मारकुंडी (सोनभद्र)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गड्ढामुक्त सड़क अभियान के दावों के बीच राबर्ट्सगंज विकास खंड के कुरुहूल माइनर क्षेत्र की बदहाल सड़क व्यवस्था सरकारी दावों को आईना दिखा रही है। त्योहारों से पहले सड़कों को गड्ढामुक्त करने के निर्देशों के बावजूद ग्रामीण संपर्क मार्गों की दुर्दशा दूर नहीं हो पा रही है। बलुई बंधी से महुआव कला, बेलकप और चिरहुली होते हुए कुरुहूल तक जाने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग आज बदहाली, गहरे गड्ढों और जलभराव की समस्या से जूझ रहा है। सड़क की हालत ऐसी है कि राहगीरों को हर कदम पर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार समस्या उठाने के बावजूद जिम्मेदार विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आई है।
गड्ढों में सड़क तलाश रहे राहगीर, पानी ने बढ़ाया खतरा
क्षेत्र के ग्रामीणों के अनुसार, संपर्क मार्ग पर जगह-जगह बने गहरे गड्ढों में पानी भर जाने से सड़क की वास्तविक स्थिति का अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में दोपहिया वाहन चालकों और पैदल चलने वालों के लिए आवागमन जोखिम भरा बना हुआ है। सड़क की बदहाली के कारण लोगों को न केवल समय गंवाना पड़ रहा है, बल्कि दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।
यह मार्ग आसपास के गांवों के लोगों के लिए आवागमन का प्रमुख साधन है। प्रतिदिन स्कूली बच्चों, किसानों, नौकरीपेशा लोगों और अन्य ग्रामीणों को इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है। सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों को उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि खराब सड़क और जलभराव के कारण स्कूली वाहनों के चालकों को भी आवागमन में दिक्कत होती है। बरसात के बाद भी यदि सड़क की स्थिति नहीं सुधरती, तो आखिर ग्रामीणों को राहत कब मिलेगी?
शासन के निर्देशों पर भारी पड़ रही विभागीय उदासीनता!
प्रदेश सरकार की ओर से सड़कों को गड्ढामुक्त करने और आम जनता को बेहतर आवागमन सुविधा उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। इसके बावजूद कुरुहूल माइनर मार्ग की स्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि शासन के निर्देशों का पालन धरातल पर किस हद तक हो रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की समस्या कोई नई नहीं है। संबंधित अधिकारियों को कई बार इसकी जानकारी दी जा चुकी है, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। यदि शिकायतों के बाद भी सड़क की मरम्मत नहीं होती, तो आम जनता अपनी फरियाद लेकर आखिर किसके पास जाए?
सवाल यह भी है कि जब त्योहारों से पहले सड़कों को दुरुस्त करने की कवायद की जा रही है, तो ग्रामीण इलाकों के इन महत्वपूर्ण संपर्क मार्गों को प्राथमिकता क्यों नहीं दी जा रही? विकास के दावे तभी सार्थक होंगे, जब उनका लाभ गांवों में रहने वाले लोगों तक पहुंचेगा।
कागजी निर्देश नहीं, धरातल पर चाहिए कार्रवाई
ग्रामीणों की परेशानी को देखते हुए अब केवल आश्वासन से काम चलने वाला नहीं है। जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचकर सड़क की वास्तविक स्थिति का जायजा लें और मरम्मत की कार्ययोजना तैयार कर समयबद्ध तरीके से काम शुरू कराएं। जलभराव की समस्या का समाधान भी जरूरी है, ताकि सड़क की मरम्मत के बाद फिर वही स्थिति उत्पन्न न हो।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क की सुध नहीं ली गई, तो आवागमन की परेशानी आगे भी बनी रहेगी। त्योहारों के दौरान लोगों की आवाजाही बढ़ने पर समस्या और गंभीर हो सकती है।
जिलाधिकारी से हस्तक्षेप की गुहार, जल्द मरम्मत की मांग
सड़क की बदहाली से परेशान अंगद, इन्द्रराज, रंजीत, बाबूलाल, विनोद, संजय, शिवानंद, विजय, रामजी सहित अन्य ग्रामीणों ने जिलाधिकारी का ध्यान इस समस्या की ओर आकृष्ट कराया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि संबंधित अधिकारियों से कुरुहूल माइनर मार्ग का स्थलीय निरीक्षण कराया जाए तथा प्राथमिकता के आधार पर सड़क की मरम्मत और जलनिकासी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
ग्रामीणों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन इस गंभीर समस्या को संज्ञान में लेकर जिम्मेदार विभाग को आवश्यक निर्देश देगा, जिससे स्कूली बच्चों, किसानों और आम राहगीरों को राहत मिल सके।
अब बड़ा सवाल—जब मुख्यमंत्री का गड्ढामुक्त सड़क अभियान सरकार की प्राथमिकता है, तो कुरुहूल माइनर मार्ग की बदहाली दूर करने में देरी क्यों? क्या जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों की परेशानी देखेंगे, या फिर गड्ढों और जलभराव से जूझते लोगों को अभी और इंतजार करना पड़ेगा? ग्रामीणों की निगाहें अब जिला प्रशासन और संबंधित विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं।




