Sonbhadra News : मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना : लक्ष्य पूरे हो गए तो प्रशासन ने 8 कन्याओं को सूची से कर दिया बाहर, सीडीओ ने दिया जांच का आश्वसान
सोमवार को समाज कल्याण विभाग द्वारा आयोजित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में लक्ष्य को लेकर ऐसा मामला सामने आया जिसके बाद सरकारी सिस्टम पर ही सवाल खड़े होने लगे।

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5:50 PM, March 23, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
० बेटियों के घर पर चल रही थी हल्दी व अन्य रश्म
० सूची से नाम गायब होने पर शादी की खुशियाँ गम में बदली
० गरीबों के सामाजिक क्षति के लिए जिम्मेदार कौन
० लक्ष्य पूरा न होने पर कभी फर्जी शादी कराये जाने का भी लग चुका है आरोप
सोनभद्र । सरकारी विभाग में लक्ष्य ही मायने रखते हैं। धरातल पर काम कैसा भी हो मगर कागजों पर पूरा होना चाहिए। सोमवार को समाज कल्याण विभाग द्वारा आयोजित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में लक्ष्य को लेकर ऐसा मामला सामने आया जिसके बाद सरकारी सिस्टम पर ही सवाल खड़े होने लगे।
दरअसल, जिले में गरीबी रेखा में जीवन यापन करने वाले लगभग 8 परिवार अपनी बेटियों की शादी 23 मार्च को रॉबर्ट्सगंज स्थित डायट परिसर में आयोजित सामूहिक विवाह योजना के तहत करने की तैयारी में जुटे थे । सभी बेटियों के घर पर रिश्तेदार भी पहुंचना शुरू कर दिये, इतना ही नहीं शादी के पूर्व की हल्दी रश्म भी अदा कर दी गयी। घर पर नाच-गान करके खुशियाँ मनाई जा रही थी। तभी शादी एक दिन पहले उन्हें पता चला कि जिन बेटियों की शादी के लिए तैयारियां चल रही है, उनका तो सूची में नाम ही नहीं है। इस खबर के बाद घर पर मायूसी छा गयी। गरीब परिवार इसकी जानकारी तत्काल ग्राम प्रधान उधम सिंह को दी। ग्राम प्रधान उधम सिंह के नेतृत्व में परिजनों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंच दोषियों पर कार्यवाही की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा।
वहीं मामला सज्ञान में आने के बाद सीडीओ जागृति अवस्थी ने जांच कर दोषियों पर कार्यवाही का आश्वाशन दिया है।
बताते चलें कि आज रॉबर्ट्स गंज स्थित डायट परिसर में 304 कन्याओं के सामूहिक विवाह का आयोजन हुआ, जिसमें 303 हिंदू कन्याओं का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विवाह सम्पन्न हुआ । वहीं एक मुस्लिम कन्या का निकाह भी पढ़ाया गया।
यहां बड़ा सवाल यह है कि जब लक्ष्य पूरे हो चुके थे तो आखिर उपरोक्त कन्याओं के परिजन को शादी के लिए आश्वासन क्यों दिया गया। समाज में हुई उनकी सामाजिक क्षति के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है । प्रशासन को इन बिंदुओं पर गौर करते हुए कड़ी कार्यवाही करनी चाहिए।
वहीं ग्राम प्रधान उधम सिंह ने बताया कि "ग्राम पंचायत मारकुण्डी के 11 आदिवासी गरीब कन्याओं का मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजनान्तर्गत ऑनलाइन आवेदन किया गया था और ग्राम पंचायत अंतर्गत कुल पात्र युवतियों का उक्त योजना के तहत स्वीकृत हुआ। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजनान्तर्गत ग्राम पंचायत मारकुण्डी से आठ युवतियां पात्र पाई गई थी। गत 20 मार्च को खण्ड विकास अधिकारी कार्यालय से सम्बद्ध अधिकारियों द्वारा सत्यापन की कार्यवाही करके 23 मार्च को सामूहिक विवाह के प्रस्तावित स्थल पर ससमय उपस्थित होने हेतु निर्देशित भी किया गया था लेकिन प्रस्ताव के उपरान्त उक्त युवतियों के परिजनों व नात-रिश्तेदारों द्वारा प्रस्तावित विवाह के क्रम में हिन्दू धर्म के अनुसार धार्मिक एवं मांगलिक कार्यक्रमों को किया जाने लगा और इस क्रम में सम्बन्धित युवतियों के घरों में हल्दी व मेंहदी के मांगलिक कार्यक्रम प्रारम्भ हो गये लेकिन गत 21 मार्च को खण्ड विकास अधिकारी राबर्ट्सगंज ने उन्हें बताया कि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का लक्ष्य प्राप्त हो जाने के कारण उनके ग्राम पंचायत अंतर्गत आठों कन्याओं को उक्त प्रस्तावित योजना से वंचित किया जाता है। इसकी जानकारी मिलते ही गांव में शादी की खुशियां गम में तब्दील हो गई और परिजन आक्रोशित हो गए। वहीं न्याय की मांग को लेकर वह लोग जिलाधिकारी मिलने आए हैं साथ ही दोषियों पर कड़ी कार्यवाही की मांग करते हैं।"
बहरहाल मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह में गड़बड़ी का यह कोई पहला मामला नहीं है, इसके पहले भी योजना चर्चाओं में आता रहा है। कभी लक्ष्य पूरा न होने पर फर्जी शादी के नाम पर, अब लक्ष्य पूरा होने पर गरीब बेटियों को शादी से महरूम रखकर। खैर प्रशासन ने जांच की बात की है लेकिन सवाल यह है कि एक गरीब के पास इज्जत से बड़ा कुछ नहीं होता, उसे भी प्रशासनिक लोगों ने खत्म कर दिया, इसकी भरपाई कैसे होगी।




