Sonbhadra News : सावधानी और जागरूकता ही रेबीज से बचाव - सीएम,ओ
विश्व रैबीज दिवस पर मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय सभागार में जूनोटिक बीमारियों को लेकर सभी नोडल अधिकारियों, वरिष्ठ चिकित्सकों समेत पशु, वन और नगर पालिका अधिकारियों की एक बैठक हुई। इस दौरान यह मुख्य...

sonbhadra
10:49 PM, September 27, 2025
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । विश्व रैबीज दिवस पर मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय सभागार में जूनोटिक बीमारियों को लेकर सभी नोडल अधिकारियों, वरिष्ठ चिकित्सकों समेत पशु, वन और नगर पालिका अधिकारियों की एक बैठक हुई। इस दौरान यह मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ0 अश्वनी कुमार मौजूद रहे। जानवरों से फैलने वाली जूनोसिस बीमारियों से बचाव तथा जागरुकता लाने की रणनीति बनाई गई।
इस दौरान सीएमओ डॉ0 अश्वनी कुमार ने बताया कि "जूनोसिस रोग ऐसी बीमारी को कहा जाता है जो इंसानों में जानवरों के माध्यम से फैलती है। पशुओं के शरीर से जब किसी बीमारी के बैक्टीरिया या वायरस इंसानी शरीर में पहुंचकर बीमारी फैलाते हैं तो ऐसी बीमारियों को जूनोसिस डिजीज कहा जाता है। जूनोसिस अर्थात पशुजन्य रोग से ऐसी बीमारियों के प्रति सभी को जागरुक करें, जो जानवरों से इंसानों में फैलती है और जो बाद में जानलेवा साबित हो जाती है। बंदर, कुत्ते, घोड़े, बिल्ली आदि जानवरों के काटने से रैबीज हो सकता है, इसलिए यदि किसी को उक्त जानवर काट लेते हैं तो तुरंत ही अस्पताल में आकर उपचार कराना चाहिए। यदि उस समय किन्हीं कारणों से अस्पताल नहीं आ सकते तो जख्म को साफ हाथों द्वारा पानी से साफ करें और फिर पट्टी बांधकर अस्पताल आएं। इससे जख्म पर कोई कीटाणु अथवा गंदगी नहीं पहुंचेगी। उन्होंने कहा कि रैबीज का इलाज सभी सरकारी अस्पतालों पर निःशुल्क किया जाता है।"
जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ0 प्रेमनाथ ने बताया कि "विश्व में लगभग 59000 व्यक्त्ति इस बीमारी से ग्रसित होकर मरते हैं साथ ही जनपद सोनभद्र में वर्ष 2023 में जानवरों से काटे गये व्यक्तियों की संख्या 12259, वर्ष 2024 में 15254 व अगस्त 2025 तक 16672 पायी गयी। इसका मुख्य कारण आवारा कुत्तों की संख्या में बढ़ोत्तरी, शहरीकरण, जंगलों की कटान, जानवरों का व्यापार, खराब पशु नियंत्रण व जनजागरूकता में कमी हो सकती है। पशु चिकित्सा विभाग से अपेक्षा की गयी कि आम नागरिकों को कुत्ते के काटने से बचाने हेतु कुत्तों का टीकाकरण कराना सुनिश्चित करें। समुदायों में संदिग्ध पागल कुत्तों को पकड़ने के लिए निगरानी प्रणाली बढ़ाना, कुत्ते के काटने की रोकथाम पर जनता को शिक्षित करने के लिए प्रचार-प्रसार कराना। माना जाता है कि जंगली जानवर पागल होते हैं और मनुष्यों में रैबीज संक्रमण फैला सकते हैं साथ ही कृषि विभाग से अपेक्षा की गयी कि स्वास्थ्य विभाग के समन्वय से रैबीज जैसी जुनोटिक बीमारी को रोकने के तरीकों के बारे में चौपालों के माध्यम से किसानों को जागरूक करें, जिससे जूनोटिक रोगों पर नियंत्रण पाया जा सके।"




