Sonbhadra news : पुल टूटा, पुलिया बही… अब क्या कसहवा घाट पर हो रहा हादसे का इंतजार ?
घाघर नदी पर आवागमन की बदहाल व्यवस्था अब गुरमा क्षेत्र के लोगों के लिए गंभीर परेशानी का सबब बन गई है।

sonbhadra
1:41 PM, September 16, 2026
राकेश चौबे
-- पुल टूटा, वैकल्पिक रास्ता भी बहा—कसहवा घाट बना गुरमा के हजारों लोगों की मजबूरी
-- बार-बार खबरों में उठी समस्या, फिर भी जिम्मेदारों की नजरें इनायत नहीं; जर्जर रास्ते से रोजाना जान जोखिम में डालकर गुजर रहे बच्चे और ग्रामीण
मारकुंडी (सोनभद्र)। घाघर नदी पर आवागमन की बदहाल व्यवस्था अब गुरमा क्षेत्र के लोगों के लिए गंभीर परेशानी का सबब बन गई है। उत्तर प्रदेश सीमेंट निगम के समय निर्मित घाघर नदी के पुराने पुल के ध्वस्तीकरण और भारी बारिश में वैकल्पिक पुलिया के बह जाने के बाद क्षेत्र का आवागमन बुरी तरह प्रभावित है। इसके बावजूद लंबे समय से चली आ रही समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में अपेक्षित पहल नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
सबसे अधिक परेशानी जिला कारागार के कर्मचारियों व मुलाकातियों तथा आसपास के विद्यालयों में पढ़ने वाले हजारों विद्यार्थियों को उठानी पड़ रही है। आवागमन की दुश्वारियों के चलते विद्यार्थियों की नियमित विद्यालय उपस्थिति, नामांकन और पढ़ाई तक प्रभावित होने की स्थिति बनी हुई है।
70 साल पुराना रास्ता बना जोखिम का सफर
कसहवा घाट पर करीब सात दशक पहले तैयार किया गया वैकल्पिक रास्ता वर्तमान में जर्जर होकर खतरनाक स्थिति में पहुंच चुका है। बारिश और नदी के बढ़े जलस्तर के बीच इस रास्ते से गुजरना ग्रामीणों के लिए जोखिम भरा साबित हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आए दिन बाइक सवार फिसलकर गिरते हैं और कई बार नदी में गिरने से चोटिल भी हो चुके हैं।
समाचार छपे, समस्या जस की तस
स्थानीय लोगों का कहना है कि कसहवा घाट की समस्या को लेकर कई बार समाचार पत्रों में खबरें प्रकाशित हो चुकी हैं, लेकिन लगातार सामने आ रही समस्या के बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है। ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन और जिम्मेदार विभाग की नींद खुलेगी?
स्थानीय नागरिकों ने जनप्रतिनिधियों और जिलाधिकारी से मांग की है कि कसहवा घाट का तत्काल चौड़ीकरण एवं उच्चीकरण कराकर सुरक्षित आवागमन की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यह महज रास्ते का सवाल नहीं, बल्कि क्षेत्र के बच्चों की शिक्षा, जिला कारागार से जुड़े लोगों की आवाजाही और हजारों नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है।
ग्रामीणों ने चेताया है कि यदि समय रहते ठोस पहल नहीं हुई तो समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।




