Sonbhadra News : 'घर-घर वेद अभियान' को लेकर हुआ मंथन, संस्कृत और गुरुकुल शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर
आधुनिक शिक्षा के बढ़ते व्यवसायीकरण, संस्कारहीन होती पीढ़ी और भारतीय ज्ञान परंपरा से बढ़ती दूरी के बीच सोनभद्र में 'घर-घर वेद अभियान' को लेकर गुरुकुल व्यवस्था के पुनर्जागरण का शंखनाद किया गया।

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6:12 PM, May 10, 2026
- सामाजिक विकास कार्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृत और निःशुल्क वैदिक शिक्षा को बढ़ावा देने पर मंथन
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । आधुनिक शिक्षा के बढ़ते व्यवसायीकरण, संस्कारहीन होती पीढ़ी और भारतीय ज्ञान परंपरा से बढ़ती दूरी के बीच सोनभद्र में 'घर-घर वेद अभियान' को लेकर आयोजित बैठक में वैदिक शिक्षा और गुरुकुल व्यवस्था के पुनर्जागरण का शंखनाद किया गया। वक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि यदि भारतीय संस्कृति, संस्कृत भाषा और सनातन ज्ञान परंपरा को बचाना है तो वेदों को फिर से हर घर तक पहुंचाना होगा और महंगी शिक्षा व्यवस्था के विकल्प के रूप में भारतीय परंपरा आधारित निःशुल्क गुरुकुल शिक्षा को मजबूत करना होगा। बैठक में वैदिक चेतना के व्यापक प्रसार और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने के लिए ठोस रणनीति पर मंथन किया गया।
इस दौरान संपूर्णानंद विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफ़ेसर डॉ0 ज्ञानेंद्र जी ने कहा कि "भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा विश्व की सबसे समृद्ध धरोहरों में शामिल है। वेद, उपनिषद, पुराण और अन्य शास्त्रों में जीवन के हर क्षेत्र से जुड़ा गहन ज्ञान मौजूद है, जिसे केवल पुस्तकों तक सीमित रखने के बजाय समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचाना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से सामाजिक विकास कार्यक्रम के माध्यम से जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।"
उन्होंने कहा कि गुरुकुल केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कार, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का आधार होता है। उन्होंने कहा कि गुरुकुल खोलने का उद्देश्य आर्थिक लाभ अर्जित करना नहीं, बल्कि समाज को शिक्षित, संस्कारित और सांस्कृतिक रूप से जागरूक बनाना है। इस दौरान भारतीय परंपरा के अनुरूप निःशुल्क शिक्षा व्यवस्था लागू करने पर भी बल दिया गया।
वहीं संस्कृत भाषा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और ज्ञान-विज्ञान की मूल आधारशिला है। संस्कृत में मौजूद ज्ञान को आज पूरा विश्व स्वीकार कर रहा है। जर्मनी, अमेरिका सहित कई देशों के विश्वविद्यालयों में संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा का अध्ययन कराया जा रहा है तथा विदेशी विद्वान भारतीय शास्त्रों पर शोध कर रहे हैं।
कार्यक्रम में उन्होंने आगे बताया कि केंद्र सरकार द्वारा भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। देश में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालयों का संचालन किया जा रहा है तथा वैदिक शिक्षा और संस्कृत अध्ययन से जुड़े संस्थानों को सहायता प्रदान की जा रही है।
उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, संस्कृत भाषा और वैदिक परंपरा से जोड़ना बेहद आवश्यक है। वैदिक शिक्षा केवल धार्मिक ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अनुशासन, नैतिकता और सकारात्मक सोच को भी विकसित करती है।
सामाजिक विकास कार्यक्रम के दौरान वेद की शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्र मांडव्य ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि वह पिछले पांच वर्षों से वेद अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें सामान्य बच्चों की तरह घूमना-फिरना या खेलकूद से अधिक वेद और संस्कृत की शिक्षा ग्रहण करना पसंद है। मांडव्य ने कहा कि भारतीय शास्त्रों में जीवन को सही दिशा देने वाला ज्ञान निहित है और वह भविष्य में गुरुकुल खोलकर अन्य बच्चों को भी वैदिक शिक्षा और संस्कार देना चाहते हैं।
कार्यक्रम के दौरान मांडव्य द्वारा संस्कृत भाषा में सुनाए गए श्लोकों और वैदिक उच्चारण ने पूरे वातावरण को भक्तिमय और आध्यात्मिक बना दिया।
उपस्थित लोगों ने उनके ज्ञान, उच्चारण और भारतीय संस्कृति के प्रति समर्पण की सराहना की।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद, संस्कृत प्रेमी और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। पूरे आयोजन में भारतीय संस्कृति, वेदों और गुरुकुल परंपरा को पुनर्जीवित करने का संदेश प्रमुख रूप से उभरकर सामने आया।




