Sonbhadra News : ब्लड बैंक क़ो हुआ 'एनीमिया', दुर्लभ नेगेटिव ग्रुपों का स्टाक खत्म
ब्लड की कमी से जिला अस्पताल का ब्लड बैंक खुद ‘एनिमिया’ का शिकार हो गया है। 500 यूनिट क्षमता वाले ब्लड बैंक में इन दिनों निगेटिव वर्ग और AB पॉजिटिव ग्रुप का कोई भी ब्लड नहीं है। रविवार को अलग-अलग....

जिला अस्पताल का ब्लड सेंटर
sonbhadra
10:51 PM, December 22, 2024
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । ब्लड की कमी से जिला अस्पताल का ब्लड बैंक खुद ‘एनिमिया’ का शिकार हो गया है। 500 यूनिट क्षमता वाले ब्लड बैंक में इन दिनों निगेटिव वर्ग और AB पॉजिटिव ग्रुप का कोई भी ब्लड नहीं है। रविवार को अलग-अलग निगेटिव वर्ग के खून के लिए तीमारदार इधर-उधर भटकने को मजबूर हुए। उन्हें संबंधित वर्ग के खून के लिए रिश्तेदारों या फिर निजी ब्लड बैंकों से चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
जिला अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में खून की कमी का दौर थम नहीं रहा है। कहने को ब्लड बैंक की क्षमता 500 यूनिट की है, लेकिन शायद ही कभी ऐसा होता हो जब सभी वर्ग के ब्लड यहां उपलब्ध रहते हों। इससे अक्सर मरीजों व उनके तीमारदारों को परेशान होना पड़ता है। मौजूदा समय में निगेटिव वर्ग का कोई भी ब्लड उपलब्ध नहीं है। ब्लड बैंक कर्मियों के अनुसार ए, बी, एबी व ओ निगेटिव और एबी पॉजिटिव वर्ग के खून नहीं है। सिर्फ 74 यूनिट ब्लड ही मौके पर मौजूद है। इसमें ए पॉजीटिव पांच यूनिट, बी पॉजिटिव 11 यूनिट जबकि ओ पॉजिटिव 58 यूनिट मौजूद है।
जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल के ब्लड बैंक में मात्र 74 यूनिट ब्लड होना कई की जान जोखिम में डाल रहा है। ब्लड बैंक में कमी कारण जिम्मेदारों का ध्यान नहीं देना बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि जिला अस्पताल के ही ब्लड बैंक से निर्धारित शुल्क देकर एक्सचेंज के बाद निजी अस्पतालों में ब्लड दिया जा रहा है। लिहाजा जरूरतमंद लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। मरीज के परिजनों को ब्लड के लिए भटकना पढ़ रहा है। समान ब्लड ग्रुप का डोनर खोजने में पसीना छूट रहा है।
ब्लड बैंक प्रभारी डॉ0अशोक कुमार ने बताया कि निगेटिव ब्लड ग्रुप की कमी तो पूरे साल बनी रहती है, लेकिन इन दिनों ए पॉजिटिव के पांच व एबी पॉजिटिव 11 समान्य तौर पर सबसे अधिक रहते है। लेकिन निगेटिव ब्लड ग्रुप वाले खोजने से भी नहीं मिलते है। निगेटिव ग्रुप ब्लड की जरूरत के लिए पीआरओ ग्रुप के साथ अन्य ग्रुपों में विगत दिनों संदेश भेजवाया गया है।




