Sonbhadra News : खेती पर रोक, पेट पर चोट ! सिंचाई विभाग के खिलाफ किसानों ने खोला मोर्चा
धंधरौल बांध के अंदर वर्षों से पुश्तैनी खेती कर अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाले सैकड़ों किसान सोमवार को कलेक्ट्रेट पहुंच गए। किसानों ने आरोप लगाया कि सिंचाई विभाग खेती करने से रोक रहा है और.....

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12:16 PM, June 29, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र। धंधरौल बांध के अंदर वर्षों से पुश्तैनी खेती कर अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाले सैकड़ों किसान सोमवार को कलेक्ट्रेट पहुंच गए। किसानों ने आरोप लगाया कि सिंचाई विभाग खेती करने से रोक रहा है और गांवों में नोटिस चस्पा कर मुकदमा दर्ज कराने की धमकी दी जा रही है। इससे गरीब किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। किसानों ने जिलाधिकारी से हस्तक्षेप कर खेती की अनुमति दिलाने की मांग की।
पुश्तैनी खेती पर लगा प्रतिबंध, किसानों में आक्रोश -
किसानों ने बताया कि धंधरौल बांध में जब तक पानी भरा रहता है तब तक वे सरकारी कार्य में कोई बाधा नहीं डालते। पानी उतरने के बाद खाली भूमि पर वर्षों से खेती करते आ रहे हैं। उनका कहना है कि यह खेती ही उनके परिवार की आजीविका का एकमात्र सहारा है, लेकिन पिछले दो-तीन वर्षों से सिंचाई विभाग के अधिकारी गांवों में नोटिस चस्पा कर खेती करने पर मुकदमा दर्ज करने की चेतावनी दे रहे हैं। इससे किसान भय के माहौल में जीने को मजबूर हैं।
खेती नहीं करेंगे तो भूखों मर जाएगा परिवार -
किसानों का कहना है कि मऊ कला, मऊ खुर्द, बल्डीहा, पड़री कला, निसोगी, करमांव, लेडुआ, सोढ़ा, लिलारी, डकहां, जगदीशपुर, तुरती, मझिड़ढ़, प्रतापपुर, सोनारी, करौदिया, शिवपुर, मटिहानी समेत दर्जनों गांवों के हजारों परिवार इसी खेती पर निर्भर हैं। यदि खेती पर रोक जारी रही तो उनके सामने भुखमरी जैसी स्थिति पैदा हो जाएगी। किसानों ने कहा कि सरकार उनके रोजगार का कोई वैकल्पिक इंतजाम किए बिना खेती भी छीन रही है।
सिंचाई विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल -
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विभाग बिना स्थायी समाधान निकाले केवल नोटिस चस्पा कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर रहा है। किसानों का कहना है कि यदि भूमि पर खेती करना अवैध है तो सरकार पहले उनके पुनर्वास और रोजगार की व्यवस्था करे। केवल मुकदमे की धमकी देकर गरीब किसानों का उत्पीड़न करना किसी भी दृष्टि से न्यायसंगत नहीं है।
डीएम से लगाई न्याय की गुहार -
कलेक्ट्रेट पहुंचे किसानों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मांग की कि सिंचाई विभाग की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए और वर्षों से खेती कर रहे किसानों के हित में स्थायी नीति बनाई जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी आजीविका छीनी गई तो व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
सैकड़ों किसान रहे मौजूद -
इस दौरान डांगर, सत्यनारायण, छोटेलाल, विजेंद्र, राममूरत, जितेंद्र, रामकेवल, पप्पू बिंद, मक्खन, रामविश्वास, बुद्धिराम बिंद, परमजतिया, लालती, परवतिया, सुदीया, बल्लरी, बुधनी, राजाराम, कमला, राजकुमार, तारा, नारद, देवंती, मंगरी, चमेली, कालिदास, राधेश्याम, रोशन, दयाराम सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।
"धंधरौल बांध के अंदर खेती करने वाले किसानों के सामने आज सबसे बड़ा सवाल अपनी आजीविका बचाने का है। एक ओर सरकार किसानों की आय बढ़ाने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर वर्षों से पुश्तैनी खेती करने वाले गरीब परिवारों को नोटिस और मुकदमों का भय दिखाया जा रहा है। यदि समय रहते सरकार और सिंचाई विभाग ने संवेदनशील निर्णय नहीं लिया तो हजारों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। ऐसे में अब देखना होगा कि प्रशासन किसानों की पीड़ा सुनता है या सरकारी आदेशों के बीच उनकी पुश्तैनी खेती हमेशा के लिए उजड़ जाती है।"




