बेसिक शिक्षा अधिकारी ने जारी विज्ञप्ति में बताया कि प्राथमिक विद्यालय मालोघाट चोपन में कार्यरत सहायक अध्यापिका जेवा अफरोज द्वारा सोशल मीडिया पर पहलगाम आतंकी हमले के सम्बन्ध में साम्प्रदायिक व विवादास्पद टिप्पणी की जा रही है। बीएसए ने बताया कि उक्त शिक्षिका अपने Face book एकाउन्ट पर विवादास्पद स्क्रीन शॉट जिसमें अंकित है कि, 'इस औरत के पति को इस लिए मारा गया क्योंकि वह हिन्दू था, उसे कलमा नहीं आता था उसके लिंग का खतना नहीं हुआ था पर टिप्पणी की गयी है कि बहुत घटिया और नीच सोच होती जा रही है। इसके अलावा आगरा में गुलफाम को मारने वाले सभी आरोपियों के सम्बन्ध में भी विवादास्पद टिप्पणी करते हुए पोस्ट किया गया है कि, 'आगरा में गुलफाम को मारने वाले सभी आरोपियों को पुलिस नें मुठभेड में पैर में गोली मारकर गिरफ्तार कर लिया है और पूरे केस की दुर्गति करते हुए इसको आपसी पैसे के लेन देन पर गोली मारने का केस बना दिया है। जो खुद हत्या के आरोपितो ने अपनी महिमा मंडित कर 26 और मुसलमानों को खुलेआम हत्या करने को कहा था। एक पूरे आतंकी संगठन को क्लीन चिट देकर कानून अपना काम कर चुका है । क्योंकि अगर इस केस की परते खुलती तो इस संगठन से जुड़े बड़े आतंकवादियों का भंण्डाफोड होता और एक दिन खून का प्यासा सभ्य समाज इन आरोपियों पर पुष्प वर्षा करते हुए इन्हे मालाओ से सम्मान देते नजर आयेगा। इसी प्रकार एक अन्य विवादास्पद पोस्ट किया गया है कि 'देश का वफादार हमेशा मुसलमान रहे हैं, गद्दार तो हमेशा संधी ही रहे हैं।" सहायक अध्यापक जेबा अफरोज का यह कृत्य उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली 1956 के सर्वथा विपरीत तथा शिक्षक गरिमा के प्रतिकूल है।