Sonbhadra News : आदिवासी अधिकारों की अनदेखी पर फूटा गुस्सा, 32 सूत्रीय मांगों को लेकर गोंगपा ने प्रदर्शन कर सौंपा ज्ञापन
आदिवासियों, मूल निवासियों और वनवासियों के अधिकारों को लेकर सोमवार को गोण्डवाना गणतंत्र पार्टी युवा मोर्चा ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम 32 सूत्रीय मांग पत्र जिलाधिकारी...

कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन करते गोंगपा के कार्यकर्ता.....
sonbhadra
3:44 PM, June 15, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । आदिवासियों, मूल निवासियों और वनवासियों के अधिकारों को लेकर सोमवार को गोण्डवाना गणतंत्र पार्टी युवा मोर्चा ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम 32 सूत्रीय मांग पत्र जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि आदिवासी बाहुल्य जनपद होने के बावजूद सोनभद्र में संविधान प्रदत्त अधिकारों की लगातार अनदेखी की जा रही है और विकास के नाम पर मूल निवासियों के हितों की उपेक्षा हो रही है। वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष अमर सिंह मरकाम ने की, जबकि संचालन जिला मीडिया प्रभारी रामरतन केराम ने किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट संतोष कुमार सेन तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रदेश महासचिव श्यामशंकर पोया और जिलाध्यक्ष रामनरेश पोया मौजूद रहे।
आदिवासियों को उनके अधिकारों से किया जा रहा वंचित -
मुख्य अतिथि एडवोकेट संतोष कुमार सेन ने कहा कि "सोनभद्र आदिवासी एवं अनुसूचित जनजाति बाहुल्य जिला होने के बावजूद यहां संविधान की पांचवीं और छठवीं अनुसूची की भावना के अनुरूप कार्य नहीं किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर आदिवासियों और मूल निवासियों की जमीन, जंगल और प्राकृतिक संसाधनों को प्रभावित किया जा रहा है, जबकि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और न्याय जैसी मूलभूत सुविधाओं से उन्हें वंचित रखा जा रहा है।उन्होंने कहा कि यदि शासन-प्रशासन आदिवासियों और मूल निवासियों की समस्याओं का समाधान नहीं करता और संविधान प्रदत्त अधिकार सुनिश्चित नहीं करता, तो गोण्डवाना गणतंत्र पार्टी जिला मुख्यालय से लेकर लखनऊ और दिल्ली तक बड़ा आंदोलन छेड़ने के लिए बाध्य होगी।"
बाहरी लोगों का बढ़ा दबदबा, मूल निवासी उपेक्षित -
विशिष्ट अतिथि श्यामशंकर पोया ने कहा कि "सोनभद्र के पिछड़ेपन का एक बड़ा कारण प्रशासनिक तंत्र और बाहरी प्रभाव है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिले के संसाधनों का लाभ स्थानीय लोगों को नहीं मिल रहा है और रोजगार तथा विकास योजनाओं में मूल निवासियों की भागीदारी लगातार कम होती जा रही है।"
वहीं जिलाध्यक्ष रामनरेश पोया ने कहा कि "वनाधिकार कानून के तहत किए गए दावों को गलत तरीके से निरस्त कर आदिवासियों और अनुसूचित जनजातियों के साथ अन्याय किया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि सभी पात्र लोगों को वनाधिकार प्रमाण पत्र जारी किए जाएं और उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।"
वन विभाग और पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप -
महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष आशा देवी मरकाम ने आरोप लगाया कि "वन विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली के कारण आदिवासी परिवारों की आजीविका प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के घरों और जीवन-यापन के साधनों पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है, जिससे उनमें असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।"
वहीं महिला मोर्चा की उपाध्यक्ष परमीला देवी ने अमवार चौकी क्षेत्र में आदिवासी बच्चों के साथ कथित दुर्व्यवहार और मारपीट के मामले को उठाते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो पार्टी आंदोलन और अनशन का रास्ता अपनाएगी।
घर-घर पानी और रोजगार की भी उठी मांग -
धरना-प्रदर्शन के दौरान पार्टी नेताओं ने मांग की कि जल जीवन मिशन के तहत प्रत्येक गांव और प्रत्येक घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जाए। साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, वनाधिकार और स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने जैसी मांगों को भी ज्ञापन में शामिल किया गया।
आंदोलन की चेतावनी -
कार्यकर्ताओं ने चेताते हुए कहा कि यदि 32 सूत्रीय मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो जिलेभर में चरणबद्ध आंदोलन चलाया जाएगा। पार्टी ने स्पष्ट किया कि आदिवासियों, वनवासियों और मूल निवासियों के अधिकारों के लिए संघर्ष और तेज किया जाएगा।
धरना-प्रदर्शन में इन्द्रावती कोरचो, ज्ञानी सिंह पोया, सत्या शाह मरकाम, अयोध्या प्रसाद, विजेन्द्र भुइयां, विनय कुमार, राजबली पोया, गणेश कुमार, संजय प्रकाश पोया समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद रहे।




