Sonbhadra News : ₹2500 प्रोत्साहन पर भड़कीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, प्रदर्शन कर सरकार से मांगा हक
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में बढ़ोतरी के बाद अब प्रोत्साहन राशि को लेकर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं।


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आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में बढ़ोतरी के बाद अब प्रोत्साहन राशि को लेकर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं।

आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में बढ़ोतरी के बाद अब प्रोत्साहन राशि को लेकर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। जिलाध्यक्ष प्रतिमा सिंह के नेतृत्व में आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ के बैनर तले कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर सरकार को धन्यवाद दिया, लेकिन साथ ही मुख्यमंत्री से मौजूदा ₹2,500 प्रोत्साहन राशि को मूल मानदेय में शामिल करने की मांग उठाई। कार्यकर्ताओं ने दो टूक कहा कि ऐसी प्रोत्साहन व्यवस्था, जिसका भुगतान नियमित और सुनिश्चित नहीं है, उनके लिए राहत के बजाय परेशानी का कारण बन रही है।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने कहा कि "सरकार द्वारा ₹5 लाख तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा और यूनिफॉर्म के लिए ₹500 की बढ़ोतरी किया जाना स्वागतयोग्य कदम है। मानदेय में भी वृद्धि के लिए उन्होंने सरकार का आभार जताया। वर्तमान घोषणा के अनुसार ₹1,500 मूल मानदेय और ₹2,500 प्रोत्साहन राशि के रूप में बढ़ाए गए हैं। कार्यकर्ताओं की मांग है कि प्रोत्साहन के रूप में घोषित ₹2,500 को भी मूल मानदेय का हिस्सा बनाया जाए, ताकि हर महीने निश्चित और नियमित भुगतान सुनिश्चित हो सके।"
कभी छह महीने बाद तो कभी सालभर बाद मिलता है भुगतान -
जिलाध्यक्ष प्रतिमा सिंह ने कहा कि "पूर्व से मिल रही प्रोत्साहन राशि का भुगतान भी कई जनपदों में नियमित नहीं है। कहीं कई महीनों की राशि लंबित है तो कहीं एक-दो महीने का भुगतान छह महीने बाद मिलता है। कुछ मामलों में तो सालभर तक भुगतान नहीं होने की शिकायतें सामने आती हैं। ऐसे में नई प्रोत्साहन राशि जोड़ देने मात्र से कार्यकर्ताओं की आर्थिक स्थिति नहीं सुधरेगी।"
उन्होंने कहा कि "प्रोत्साहन राशि के नाम पर ऐसी व्यवस्था बनाई गई है, जिसमें भुगतान की निश्चितता नहीं है। इससे कार्यकर्ताओं को आर्थिक सुरक्षा मिलने के बजाय उन्हें भुगतान के लिए विभागीय चक्कर लगाने पड़ते हैं। यदि सरकार वास्तव में आंगनबाड़ी बहनों का हित चाहती है तो ₹2,500 को मूल मानदेय में शामिल करे।"
GPS व्यवस्था पर भी जताया विरोध -
कार्यकर्ताओं ने पोषण ट्रैकर ऐप के माध्यम से केंद्र संचालन और उपस्थिति दर्ज करने के लिए लागू GPS व्यवस्था को भी कठिन बताया। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या आम है। आर्थिक तंगी के कारण कई कार्यकर्ताओं के लिए मोबाइल रिचार्ज तक नियमित कराना मुश्किल होता है। ऐसे में GPS आधारित उपस्थिति व्यवस्था व्यवहारिक रूप से चुनौतीपूर्ण है।
कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि उन्हें विभागीय बैठक, प्रशिक्षण, रैली, परियोजना कार्यालय और अन्य सरकारी कार्यों के लिए केंद्र से बाहर जाना पड़ता है। ऐसी स्थिति में GPS के जरिए केंद्र की उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाने पर कार्यकर्ता को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
प्रोत्साहन के नाम पर भ्रष्टाचार की गुंजाइश -
प्रदेश महासचिव साधना विश्वकर्मा ने कहा कि "कार्यकर्ताओं को नियमित और निश्चित मानदेय की जरूरत है, न कि ऐसी प्रोत्साहन व्यवस्था की, जिसका भुगतान ही समय से सुनिश्चित न हो। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रोत्साहन राशि के नाम पर भुगतान की अनिश्चित व्यवस्था भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने की गुंजाइश पैदा करती है। इसलिए प्रोत्साहन राशि की व्यवस्था समाप्त कर उसे मूल मानदेय में शामिल किया जाना चाहिए।"
उन्होंने कहा कि "आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से लगातार बढ़ते विभागीय काम लिए जा रहे हैं। पोषण ट्रैकर, GPS, बैठकों और प्रशिक्षण समेत तमाम जिम्मेदारियों के बीच उनकी आर्थिक और व्यावहारिक परेशानियों को भी सरकार को समझना होगा।"
इस दौरान सीमा, रेखा, शकुंतला, इंद्रावती, इंदु, अनीता, मीरा, बिंद्रा, गीता, मधु, ममता पाठक, संध्या, विभा, सोनी, शकुंतला, सविता, माधुरी, निशा, मनोरमा, रंजना, दीप्ति सिंह, सोनम सहित अन्य आंगनबाड़ी कार्यकर्ती मौजूद रही।
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