Sonbhadra News : सपा में टूट की चर्चाओं के बीच सांसद छोटेलाल का मास्टरस्ट्रोक, राजभर-निषाद को दिया मंत्री पद के साथ विलय का ऑफर
कुछ दिनों पूर्व समाजवादी पार्टी में संभावित टूट और अंदरूनी खींचतान की खबरें राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई थीं। इसी बीच रॉबर्ट्सगंज से समाजवादी पार्टी के सांसद छोटेलाल खरवार ने एक ऐसा...…

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9:19 PM, June 19, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• सपा में आइए, चुनाव भी जिताएंगे और मंत्री भी बनाएंगे - छोटेलाल खरवार
• भाजपा के सहयोगी दलों में सेंध लगाने की कोशिश, पूर्वांचल की राजनीति में बढ़ी हलचल
सोनभद्र । कुछ दिनों पूर्व समाजवादी पार्टी में संभावित टूट और अंदरूनी खींचतान की खबरें राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई थीं। इसी बीच रॉबर्ट्सगंज से समाजवादी पार्टी के सांसद छोटेलाल खरवार ने एक ऐसा राजनीतिक दांव चल दिया है, जिसने प्रदेश की सियासत में नई बहस छेड़ दी है। सांसद ने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ0 संजय निषाद को अपनी-अपनी पार्टियों का समाजवादी पार्टी में विलय करने का खुला ऑफर देते हुए उन्हें चुनाव जिताने और मंत्री पद दिलाने तक की पेशकश कर दी है।
सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में सांसद छोटेलाल खरवार ने कहा कि "ओमप्रकाश राजभर और डॉ0 संजय निषाद अपने-अपने समाज के बड़े नेता हैं। यदि वे समाजवादी पार्टी में शामिल होते हैं तो उन्हें पूरा सम्मान और राजनीतिक भागीदारी दी जाएगी। उन्होंने दावा किया कि सपा उन्हें विधानसभा चुनाव जिताने के साथ-साथ सरकार बनने पर कैबिनेट मंत्री बनाने का भी काम करेगी। सांसद ने भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उसके सहयोगी दलों और पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) वर्ग के नेताओं को अपेक्षित सम्मान नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा में सहयोगी दल केवल चुनावी गणित का हिस्सा बनकर रह गए हैं, जबकि समाजवादी पार्टी सामाजिक न्याय और सम्मानजनक भागीदारी की राजनीति करती है। इतना ही नहीं, सांसद ने भाजपा में मौजूद पीडीए वर्ग के नेताओं से भी समाजवादी पार्टी में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि जो नेता अपने समाज के अधिकारों और सम्मान की लड़ाई लड़ना चाहते हैं, उनके लिए समाजवादी पार्टी सबसे उपयुक्त मंच है।"
राजनीतिक जानकारों की मानें तो सांसद का यह बयान केवल एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि भाजपा के सहयोगी दलों में सेंध लगाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। पूर्वांचल की राजनीति में राजभर और निषाद समाज का प्रभाव काफी महत्वपूर्ण माना जाता है, ऐसे में सांसद की यह पेशकश आगामी विधानसभा चुनाव से पहले नए राजनीतिक समीकरणों का संकेत भी मानी जा रही है।




