Sonbhadra News : कंडम घोषित कर बेच दिया जाता है एंबुलेंस का सामान
सरकारी एंबुलेंस से भले ही मरीजों को लाभ न मिले पर संचालन करने वाली संस्था के कर्मचारी मालामाल हो रहे हैं। कंडम घोषित कर एंबुलेंस का सारा सामान धीरे-धीरे करके बेच दिया जाता है। ये सामान बेचकर कर्मचारी.

L-2 परिसर में खड़ी कंडम एम्बुलेंस व सीएमओ डॉ0 अश्वनी कुमार
sonbhadra
8:06 AM, November 30, 2024
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । सरकारी एंबुलेंस से भले ही मरीजों को लाभ न मिले पर संचालन करने वाली संस्था के कर्मचारी मालामाल हो रहे हैं। कंडम घोषित कर एंबुलेंस का सारा सामान धीरे-धीरे करके बेच दिया जाता है। ये सामान बेचकर कर्मचारी अपनी जेंबेें भर रहे हैं और सरकार को नुकसान पहुंचा रहे हैं, लेकिन किसी को भी इसकी कानों कान भनक तक नहीं है।
मरीज के नहीं लेकिन एम्बुलेंस कर्मचारियों के खूब काम आ रही 108 एम्बुलेंस -
दुर्घटना के मरीजों के साथ ही महिलाओं और बच्चों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए निःशुल्क एंबुलेंस सेवा का संचालन किया जा रहा है। जिले में वर्तमान में 102 और 108 एंबुलेंस सेवा की कुल 46 गाड़ियों का संचालन हो रहा है। कई बार एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंचती है तो कई बार उपलब्ध ही नहीं हो पाती है। इससे मरीजों को परेशानी होती है लेकिन एंबुलेंस संचालन करने वाली संस्था के कर्मचारियों के काम ये एंबुलेंस खूब आ रही हैं। कभी फर्जी केस दिखाकर डीजल चोरी की जाती है तो कभी एंबुलेंस का सामान भी बेच दिया जाता है।
कंडम एम्बुलेंस से ऐसे अपनी जेब भरते हैं कर्मचारी -
दरअसल एंबुलेंस के कंडम होने की रिपोर्ट लगाने के बाद एंबुलेंस को खड़ा कर दिया जाता है। इसके बाद ही असली खेल शुरू होता है। एक-एक करके हेडलाइट, मीटर, खिड़कियां, वायरिंग, रिम और टायर सभी का सौदा होता है। इतना ही नहीं इंजन का सामान भी खोलकर बेच दिया जाता है। देखते ही देखते चलती फिरती एंबुलेंस केवल कबाड़ रह जाती है। सरकार को ये सामान बेचकर जिम्मेदार चूना लगा रहे हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग को इसकी कोई परवाह नहीं है। मेडिकल कॉलेज परिसर के एल-2 हॉस्पिटल के सामने खड़ी लगभग आधा दर्जन कंडम एंबुलेंस इस पूरे खेल की गवाही देने के लिए पर्याप्त हैं।




