Sonbhadra News : निजी ऑपरेशन में लापरवाही का आरोप, कटी पेशाब की थैली, महीनों दर्द झेलती रही महिला, अब डीएम से न्याय की गुहार
जनपद में निजी अस्पतालों की चमक-दमक के पीछे मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ के आरोप एक बार फिर व्यवस्था के सामने बड़ा सवाल बनकर खड़े हैं। रॉबर्ट्सगंज क्षेत्र के परासी पांडेय गांव की सुनीता पांडेय पत्नी....

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8:29 AM, August 8, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• शिकायत मिलते ही स्वास्थ्य विभाग ने ओटी सील कर थमाया नोटिस
सोनभद्र । जनपद में निजी अस्पतालों की चमक-दमक के पीछे मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ के आरोप एक बार फिर व्यवस्था के सामने बड़ा सवाल बनकर खड़े हैं। रॉबर्ट्सगंज क्षेत्र के परासी पांडेय गांव की सुनीता पांडेय पत्नी राजीव देव पांडेय ने कथरी स्थित एक निजी अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाया है। महिला का दावा है कि ऑपरेशन के दौरान उनकी पेशाब की थैली कट गई, जिसके बाद वह लंबे समय तक दर्द और गंभीर परेशानी से जूझती रहीं। इलाज के लिए बीएचयू तक जाना पड़ा, आर्थिक बोझ अलग बढ़ता गया। अब महीनों बाद पीड़िता ने जिलाधिकारी का दरवाजा खटखटाकर न्याय की गुहार लगाई है।
ऑपरेशन के बाद जिंदगी हुई मुहाल -
जिलाधिकारी को दिए प्रार्थना पत्र के मुताबिक सुनीता पांडेय 25 सितंबर 2025 को कथरी स्थित उपकार हॉस्पिटल एंड मल्टी स्पेशियलिटी आयुर्वेदिक पंचकर्म एवं न्यूरोसर्जरी सेंटर में बच्चेदानी के ऑपरेशन के लिए भर्ती हुई थीं। महिला का आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान कथित चिकित्सकीय लापरवाही के कारण उनकी पेशाब की थैली कट गई। इसके बाद लगातार पेशाब निकलने की समस्या शुरू हो गई। जिस ऑपरेशन से राहत की उम्मीद थी, उसी के बाद उनकी मुश्किलें बढ़ती चली गईं।
स्थानीय इलाज से बात नहीं बनी तो बीएचयू पहुंची महिला -
शिकायत के अनुसार ऑपरेशन के बाद समस्या बनी रहने पर महिला को आगे के उपचार के लिए बीएचयू अस्पताल जाना पड़ा। लंबे इलाज के दौरान शारीरिक परेशानी के साथ आर्थिक संकट ने भी परिवार को झकझोर दिया। पीड़िता का कहना है कि घटना को लेकर रॉबर्ट्सगंज कोतवाली में भी न्याय की गुहार लगाई गई, लेकिन अभी तक मामले में उन्हें न्याय नहीं मिल सका है।
अस्पताल पर ही नहीं, विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल -
यह मामला सिर्फ एक महिला की शिकायत तक सीमित नहीं है। असली सवाल उस व्यवस्था से है जिसके भरोसे जिले में निजी अस्पताल संचालित होते हैं। मरीज अस्पताल को इसलिए चुनता है क्योंकि उसे भरोसा होता है कि वहां प्रशिक्षित चिकित्सक, जरूरी संसाधन और सुरक्षित उपचार की व्यवस्था होगी। लेकिन यदि किसी ऑपरेशन के बाद मरीज गंभीर जटिलता का आरोप लगाते हुए महीनों तक इलाज कराने को मजबूर हो जाए, तो फिर अस्पताल के पंजीकरण, संसाधनों और चिकित्सकीय व्यवस्था की जांच पहले क्यों नहीं हुई, यह सवाल उठना स्वाभाविक है।
‘रेवड़ी की तरह पंजीकरण’ के आरोप, फिर हादसे के बाद जागता है विभाग -
जिले में निजी अस्पतालों के पंजीकरण को लेकर लंबे समय से तरह-तरह के सवाल उठते रहे हैं। आरोप लगते हैं कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा पंजीकरण की प्रक्रिया में पर्याप्त सख्ती नहीं बरती जाती और शिकायत सामने आने के बाद विभाग सक्रिय होता है। इसके बाद नोटिस, जांच और सीलिंग की कार्रवाई का दौर शुरू होता है। सवाल यह है कि स्वास्थ्य व्यवस्था में ‘पहले पंजीकरण, फिर शिकायत और उसके बाद कार्रवाई’ का यह मॉडल कब बदलेगा? मरीज की जिंदगी कोई प्रयोगशाला नहीं कि गलती होने के बाद विभाग कागजों में जांच बैठाता रहे।
सिर्फ ओटी सील करने से खत्म नहीं होगी पीड़िता की पीड़ा -
विभागीय कार्यवाही अपनी जगह है, लेकिन पीड़िता के लिए असली न्याय तभी होगा जब पूरे मामले की निष्पक्ष और विशेषज्ञ जांच हो। यदि जांच में चिकित्सकीय लापरवाही की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारी तय करते हुए नियमानुसार प्रभावी कार्रवाई के साथ पीड़िता को उचित राहत दिलाना भी जरूरी होगा। केवल नोटिस और सीलिंग की कार्यवाही से उस महिला की शारीरिक और आर्थिक पीड़ा खत्म नहीं होगी, जो कथित तौर पर महीनों से इलाज के लिए भटक रही है।
नोटिस और सीलिंग से नहीं चलेगा काम, तय करनी होगी जिम्मेदारी -
यदि किसी निजी अस्पताल पर चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप सामने आता है तो जांच निष्पक्ष और विशेषज्ञ स्तर पर होनी चाहिए। आरोप सही पाए जाने पर जिम्मेदार चिकित्सक और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। केवल नोटिस जारी कर देना या अस्पताल सील कर देना उस मरीज की पीड़ा का समाधान नहीं है, जो इलाज के नाम पर अपनी सेहत, समय और पैसा गंवा चुका हो।
डीएम के दरबार में पहुंची पीड़िता, अब स्वास्थ्य विभाग की अग्निपरीक्षा -
सुनीता पांडेय ने तीन अगस्त 2026 को जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच, दोषियों के विरुद्ध आवश्यक कार्यवाही और न्याय की मांग की है। अब निगाह जिलाधिकारी की कार्रवाई और स्वास्थ्य विभाग की जांच पर टिकी है। जांच यह तय करेगी कि महिला के आरोपों में कितनी सच्चाई है, लेकिन इस शिकायत ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है- आखिर निजी अस्पतालों की निगरानी मरीज के साथ कथित लापरवाही होने के बाद होगी या उससे पहले, ताकि ऐसी नौबत ही न आए?




