Sonbhadra News : खनन पट्टे की रजिस्ट्री पर फर्जीवाड़े का आरोप, कोर्ट ने पुलिस को FIR दर्ज करने का दिया आदेश
खनिज संपदा और पट्टों को लेकर पहले से सवालों के घेरे में रहने वाले जनपद सोनभद्र में अब बालू-मोरम खनन पट्टे की रजिस्ट्री में कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप गंभीर हैं और मामला न्यायालय तक...

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1:01 AM, August 15, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । खनिज संपदा और पट्टों को लेकर पहले से सवालों के घेरे में रहने वाले जनपद सोनभद्र में अब बालू-मोरम खनन पट्टे की रजिस्ट्री में कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप गंभीर हैं और मामला न्यायालय तक पहुंचने के बाद अदालत ने थाना जुगैल पुलिस को एफआईआर दर्ज कर नियमानुसार विवेचना करने का आदेश दिया है। न्यायालय के आदेश के बाद अब पुलिस जांच में रजिस्ट्री से जुड़े दस्तावेजों और हस्ताक्षरों की हकीकत सामने आने की उम्मीद है।
मामला मैसर्स ओमेक्स मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशक सचिन अग्रवाल से जुड़ा है। चंदन दुबे की ओर से न्यायालय में दाखिल प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया कि ग्राम खेबंधा में करीब सात हेक्टेयर क्षेत्रफल में बालू-मोरम खनन का पांच वर्षीय पट्टा 09 जनवरी 2023 से 08 जनवरी 2028 तक स्वीकृत था। इस पट्टे की रजिस्ट्री 23 जनवरी 2023 को कराई गई थी।
इस्तीफा पहले, रजिस्ट्री में हस्ताक्षर बाद में -
शिकायत में सबसे गंभीर सवाल कथित तौर पर निदेशक पद से इस्तीफे की तारीख को लेकर उठाया गया है। आरोप है कि सचिन अग्रवाल ने 14 नवंबर 2022 को निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया था, जबकि इसके बावजूद 23 जनवरी 2023 को हुई रजिस्ट्री में उनके द्वारा निदेशक के रूप में हस्ताक्षर किए गए और फोटो भी खिंचवाई गई।शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि यदि इस्तीफा पहले ही हो चुका था तो रजिस्ट्री के समय निदेशक के रूप में हस्ताक्षर और फोटो किस आधार पर हुए? इसी को लेकर रजिस्ट्री में कूटरचित दस्तावेजों के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया है। हालांकि आरोपों की पुष्टि अभी पुलिस विवेचना के बाद ही हो सकेगी।
पुलिस से कार्यवाही नहीं हुई तो खटखटाया अदालत का दरवाजा -
शिकायतकर्ता के अनुसार मामले में पुलिस से शिकायत किए जाने के बावजूद अपेक्षित कार्यवाही नहीं हुई। इसके बाद न्याय पाने के लिए न्यायालय की शरण ली गई। प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत ने मामले को गंभीर और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में मानते हुए थाना जुगैल पुलिस को प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया।
अब जांच खोलेगी रजिस्ट्री के पीछे का राज -
न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस के सामने अब रजिस्ट्री से जुड़े दस्तावेज, कंपनी के निदेशक पद से संबंधित अभिलेख, हस्ताक्षर, फोटो और अन्य रिकॉर्ड की जांच की चुनौती है। पुलिस विवेचना में यह स्पष्ट होगा कि रजिस्ट्री के समय सचिन अग्रवाल की वास्तविक भूमिका क्या थी और शिकायत में लगाए गए कूटरचना के आरोपों में कितनी सच्चाई है।




