Sonbhadra News : मौतों के बाद खुलने लगीं अवैध खनन की परतें, अद (एस) ने सीडीओ पर लगाया दुर्व्यवहार का आरोप, चढ़ा सियासी पारा
सोन नदी हादसे में एक बच्चे समेत तीन युवकों की मौत ने जिले में वर्षों से चल रहे अवैध खनन के मुद्दे को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। हादसे के बाद अब प्रशासन सवालों के घेरे में है और सबसे बड़ी बात....

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2:56 PM, June 25, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । सोन नदी हादसे में एक बच्चे समेत तीन युवकों की मौत ने जिले में वर्षों से चल रहे अवैध खनन के मुद्दे को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। हादसे के बाद अब प्रशासन सवालों के घेरे में है और सबसे बड़ी बात यह है कि सरकार के सहयोगी दल ही प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। एक तरफ राष्ट्रीय लोकदल ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है, वहीं दूसरी तरफ अपना दल (एस) के कार्यकर्ताओं ने अवैध खनन को मौतों की वजह बताते हुए मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) जागृति अवस्थी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
सीडीओ पर लगाया दुर्व्यवहार का आरोप -
जिले में चर्चा का विषय बना यह मामला आज उस समय और गरमा गया जब अपना दल (एस0) के पदाधिकारी सोन नदी हादसे और कथित अवैध खनन के मुद्दे पर वार्ता करने मुख्य विकास अधिकारी के कार्यालय पहुंचे। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि वे अभी अपनी बात शुरू भी नहीं कर पाए थे कि उन्हें कार्यालय से बाहर जाने के लिए कहा गया और विरोध करने पर जेल भेजने तक की चेतावनी दी गई। इससे नाराज कार्यकर्ता सीडीओ कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
जिम्मेदारों की लापरवाही ने लील ली तीन जिंदगियाँ -
प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं ने कहा कि सोन नदी में भारी मशीनों से किए गए खनन के कारण नदी के भीतर कई स्थानों पर गहरे गड्ढे बन गए हैं। इन्हीं गड्ढों में डूबने से तीन युवकों की जान चली गई। उनका आरोप है कि अवैध खनन की शिकायतें लगातार की जाती रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने आंखें मूंदे रखीं। नतीजा यह हुआ कि तीन परिवारों के घरों में मातम छा गया।
जब सब नियमानुसार हो रहा था तो कैसे हुआ हादसा, सहयोगी दलों ने उठाया बड़ा सवाल -
हादसे के बाद राष्ट्रीय लोकदल भी खुलकर मैदान में उतर आया है। रालोद नेताओं ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर घटना की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की माँग करने के साथ ही खनन गतिविधियों में किसी प्रकार की लापरवाही या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो दोषी अधिकारियों और खनन से जुड़े लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। पार्टी ने मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता और न्याय दिलाने की भी मांग की है।
ऐसे में राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर यदि सब कुछ नियमानुसार चल रहा था तो सोन नदी में ऐसे हालात कैसे बने, जिनमें तीन युवकों की जान चली गई। हादसे के बाद प्रशासन द्वारा संबंधित क्षेत्र में खनन गतिविधियां रुकवाए जाने की चर्चा ने भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
सीडीओ ने सभी आरोपों को किया सिरे से खारिज -
वहीं मुख्य विकास अधिकारी जागृति अवस्थी ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा किसी भी कार्यकर्ता या जनप्रतिनिधि के साथ कोई अभद्र व्यवहार नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि उस समय कार्यालय में महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्य और बैठकें चल रही थीं। बड़ी संख्या में लोग एक साथ कक्ष में पहुंच गए थे, जिससे कार्यालयीन कार्य प्रभावित हो रहा था। सीडीओ ने कहा कि प्रशासन जनसमस्याओं के समाधान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी शिकायत को नियमानुसार सुना जाता है। उन्होंने कहा कि किसी को धमकाने या अपमानित करने जैसी कोई घटना नहीं हुई है। यदि किसी को कोई शिकायत है तो उसके लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपनी बात रखी जा सकती है।




