Sonbhadra News : पहली मानसूनी बारिश में बहे 'प्रशासनिक दावे'! फ्लाईओवर फिर बना 'वाटरफॉल', शहर बना 'तालाब'
जिले में प्रशासनिक नेतृत्व जरूर बदल गया, लेकिन अधिकारियों की कार्यशैली आज भी पुरानी ही नजर आ रही है। नवागत जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने कार्यभार संभालते ही मानसून को लेकर सभी विभागों की बैठक कर......

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7:26 AM, July 1, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । जिले में प्रशासनिक नेतृत्व जरूर बदल गया, लेकिन अधिकारियों की कार्यशैली आज भी पुरानी ही नजर आ रही है। नवागत जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने कार्यभार संभालते ही मानसून को लेकर सभी विभागों की बैठक कर निर्देशित किया था कि बारिश से पहले नालियों की सफाई, जलनिकासी व्यवस्था दुरुस्त करने और रॉबर्ट्सगंज फ्लाईओवर पर पाइप लगाने जैसे सभी कार्य समय रहते पूरे कर लिए जाएं, ताकि बरसात में आम जनता को किसी तरह की परेशानी न हो लेकिन लगता है कि जिम्मेदार अधिकारियों ने जिलाधिकारी के निर्देशों को गंभीरता से लेने के बजाय केवल कागजों में खानापूर्ति कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली। नतीजा यह हुआ कि मानसून की पहली ही हल्की बारिश ने जिला प्रशासन और नगर पालिका की तैयारियों की परतें उधेड़ कर रख दीं। बरसात शुरू होते ही शहर की सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं, नालियां उफनाने लगीं और करोड़ों रुपये की लागत से बना फ्लाईओवर एक बार फिर 'वाटरफॉल' बन गया।
फ्लाईओवर फिर बना 'वाटरफॉल', नीचे से गुजरना बना खतरा -
बारिश शुरू होते ही शहर के कई प्रमुख मार्गों पर जलभराव हो गया। नालियां उफनाकर सड़कों पर बहने लगीं और करोड़ों रुपये की लागत से बना फ्लाईओवर एक बार फिर झरने का रूप ले बैठा। ऊपर से गिरते पानी ने राहगीरों और वाहन चालकों की मुश्किलें बढ़ा दीं। नीचे से गुजरने वाले राहगीर और दोपहिया वाहन चालक जान जोखिम में डालकर निकलते रहे। वर्षों से चली आ रही इस समस्या के समाधान का दावा करने वाले विभाग पहली ही बारिश में बेनकाब हो गए।
फाइलों तक सीमित डीएम के आदेश -
जिलाधिकारी के कार्यभार संभालने के बाद मानसून को देखते हुए नगर पालिका और संबंधित विभागों को निर्देशित किया था कि बरसात से पहले नालियों की सफाई पूरी कराई जाए, जलभराव वाले स्थानों को चिन्हित कर समाधान किया जाए तथा करीब साढ़े तीन किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर पर पाइप लगाकर पानी की निकासी सुनिश्चित की जाए, ताकि ऊपर से गंदा पानी राहगीरों पर न गिरे। लेकिन पहली ही बारिश ने साबित कर दिया कि निर्देश फाइलों में ही सीमित रह गए और जिम्मेदार विभागों ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया।
बोले नगरवासी, बरसात में बह गए विकास के करोड़ों रुपए -
पहली ही बारिश के बाद शहरवासियों में नगर पालिका और संबंधित विभागों के प्रति नाराजगी साफ दिखाई दी। लोगों का कहना है कि हर वर्ष मानसून से पहले बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन बारिश आते ही सारी व्यवस्थाएं ध्वस्त हो जाती हैं। तैयारियों को लेकर खर्च होने वाले करोड़ों रुपए बारिश के पानी में बह जाते हैं। यदि पहली बारिश में ही शहर की यह हालत है, तो लगातार होने वाली बारिश में हालात कितने भयावह होंगे, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।




