Sonbhadra News : निजी अस्पतालों पर चला प्रशासन का डंडा, दो अस्पताल सीज, एक की ओटी बंद, आयुष्मान से बाहर होगा सहारा हॉस्पिटल
जिले में निजी अस्पतालों की मनमानी और स्वास्थ्य मानकों की अनदेखी पर आखिरकार प्रशासन का डंडा चल गया। जिलाधिकारी चर्चित गौड़ के सख्त निर्देश के बाद स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने....

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7:41 PM, June 24, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । जिले में निजी अस्पतालों की मनमानी और स्वास्थ्य मानकों की अनदेखी पर आखिरकार प्रशासन का डंडा चल गया। जिलाधिकारी चर्चित गौड़ के सख्त निर्देश के बाद स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने मंगलवार को कई निजी अस्पतालों और क्लीनिकों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान गंभीर अनियमितताएं मिलने पर कृधा हॉस्पिटल और दुर्गा पॉली क्लिनिक को सीज कर दिया गया, जबकि जीवनदीप हॉस्पिटल की ऑपरेशन थिएटर (ओटी) सीज कर दी गई। वहीं सहारा हॉस्पिटल को आयुष्मान भारत योजना से डी-पैनल करने की संस्तुति शासन को भेजी जा रही है।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ0 रमेश कुमार मिश्रा के निर्देशन में अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ0 गुलाब शंकर, उपजिलाधिकारी रॉबर्ट्सगंज और क्षेत्राधिकारी नगर रणधीर मिश्रा की संयुक्त टीम ने विभिन्न अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान क्रीघा हॉस्पिटल, पन्नूगंज रोड में चिकित्सक अनुपस्थित मिले। अस्पताल में मरीजों का इलाज बिना अधिकृत डॉक्टर की मौजूदगी के किए जाने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए ओपीडी, वार्ड और ऑपरेशन थिएटर को सीज कर दिया।
छापेमारी के दौरान जीवनदीप हॉस्पिटल, कम्हारी में भर्ती मरीजों के अभिलेखों की जांच में गंभीर खामियां सामने आईं। मरीजों के ऑपरेशन से संबंधित जरूरी दस्तावेज और एनेस्थीसिया विशेषज्ञ के नोट्स उपलब्ध नहीं पाए गए। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए अस्पताल की ओटी को तत्काल प्रभाव से सीज कर दिया गया।
सहारा हॉस्पिटल बभनौली में भी मरीजों के मेडिकल रिकॉर्ड अधूरे और नियमों के विपरीत पाए गए। मामले को गंभीर मानते हुए अस्पताल को आयुष्मान भारत योजना से बाहर करने की संस्तुति शासन को भेजी जा रही है। यदि प्रस्ताव स्वीकृत होता है तो अस्पताल को आयुष्मान योजना के तहत मरीजों का इलाज करने की अनुमति नहीं मिलेगी।
कार्रवाई की सबसे बड़ी मार दुर्गा पॉली क्लिनिक पर पड़ी, जहां लगातार दूसरी बार निरीक्षण के दौरान चिकित्सक अनुपस्थित मिले। बार-बार चेतावनी और जांच के बावजूद सुधार न होने पर प्रशासन ने क्लिनिक को सीज कर दिया।
हालांकि निरीक्षण के दौरान पंचशील हॉस्पिटल छपका और बनारस पॉली क्लिनिक उरमौरा की व्यवस्थाएं संतोषजनक और निर्धारित मानकों के अनुरूप पाई गईं।
जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने बताया कि "मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले अस्पतालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही, फर्जीवाड़ा, मानकों की अनदेखी और नियमों के उल्लंघन पर आगे भी इसी तरह की कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद जिले के निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम संचालकों में हड़कंप मच गया है।"




