Sonbhadra News : Gen-Z और Gen-Alfa के प्रदर्शन के बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर, मगर बदलनी होगी सोच
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में Gen-Z और Gen-Alfa के प्रदर्शन की खबर के बाद सोनभद्र में भी जिला प्रशासन अलर्ट मोड में नजर आने लगा है।


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Janpad Mirror
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में Gen-Z और Gen-Alfa के प्रदर्शन की खबर के बाद सोनभद्र में भी जिला प्रशासन अलर्ट मोड में नजर आने लगा है।

शांतनु कुमार
सोनभद्र । उत्तर प्रदेश के कई जिलों में Gen-Z और Gen-Alfa के प्रदर्शन की खबर के बाद सोनभद्र में भी जिला प्रशासन अलर्ट मोड में नजर आने लगा है।
बुधवार को जिलाधिकारी चर्चित गौड़ की अध्यक्षता में जनपद के विद्यालयों में विद्यार्थियों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने एवं शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किए जाने के संबंध में बैठक आयोजित की गई।
बैठक में जिलाधिकारी ने भले ही बेसिक शिक्षा अधिकारी को प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पठन-पाठन व्यवस्था के साथ पेयजल, स्वच्छता, शौचालय, जैसी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं देने की बात कही हो मगर जमीनी हकीकत यह है कि जनपद में कई बन्द विद्यालय हैं जो सिर्फ शिक्षामित्रों के भरोसे चल रहे हैं। जबकि कई ऐसे विद्यालय हैं जहां शिक्षकों की भरमार है।
जिलाधिकारी ने बैठक में स्वच्छता और शौचालय की बात की, जमीनी हकीकत यह है कि जनपद में आधे से ज्यादा विद्यालयों में शौचालय इतने गन्दे और टूटे हैं कि वे उपयोग में ही नहीं हैं । पेयजल की भी वही दशा है।
एक कड़वा सच यह है कि प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय विद्यालयों का गुणगान नेता से लेकर अधिकारी तक सब करते हैं लेकिन कोई खुद के बच्चे को पढ़ाना नहीं चाहता। सबसे बड़ी विडंबना देखिये कि सरकारी स्कूल का अध्यापक गाँव में घूम-घूम कर बच्चों को स्कूल चलने के लिए प्रेरित करता है मगर खुद के बच्चे को प्राइवेट स्कूलों में भेजकर गौरवान्वित महसूस करता है।
कुल मिलाकर जिस दिन सरकारी स्कूलों में नेता से लेकर अधिकारी और सरकारी कर्मचारियों के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ने लगेंगे उस दिन जिलाधिकारी को न समीक्षा बैठक करने की जरूरत पड़ेगी और न टीम गठित करने की।
जिस तरीके से जिलाधिकारी ने अपना जन्मदिन कस्तूरबा गाँधी आवासीय विद्यालय के बच्चों के बीच मनाकर एक मानवता का संदेश दिया, उस तरह यदि सभी अधिकारी हर शुभ अवसर पर विभिन्न बच्चों के साथ उस पर्व को मनाये तो निश्चित तौर पर वहाँ की समस्या बच्चे सड़क पर लेकर नहीं जायेंगे बल्कि उन अधिकारियों से मिलकर हल करा लेंगे।
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