Sonbhadra News : आपदा प्रबंधन को लेकर प्रशासन अलर्ट, गांव-गांव चलाया जा रहा जागरूकता अभियान
बरसात और संभावित प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए सोनभद्र जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। जनपद में प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली जनहानि एवं दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक जन....

sonbhadra
5:03 PM, June 3, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• जिलाधिकारी के निर्देशन में वॉल राइटिंग, चेतावनी बोर्ड और सुरक्षा उपायों से लोगों को किया जा रहा जागरूक
सोनभद्र । बरसात और संभावित प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए सोनभद्र जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। जनपद में प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली जनहानि एवं दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक जन-जागरूकता अभियान शुरू किया है। जिलाधिकारी चर्चित गौड़ के निर्देशन में चलाए जा रहे इस विशेष अभियान के तहत ग्राम पंचायतों से लेकर सार्वजनिक स्थलों तक लोगों को आपदा से बचाव के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
अभियान के अंतर्गत ग्राम पंचायत सचिवालयों तथा अन्य प्रमुख सार्वजनिक स्थानों की दीवारों पर 'क्या करें और क्या न करें' विषयक वॉल राइटिंग कराई जा रही है। इसके माध्यम से आमजन को आंधी-तूफान, बिजली गिरने, बाढ़, जलभराव, डूबने जैसी प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के उपायों की जानकारी दी जा रही है।
जिला प्रशासन द्वारा दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए खुले पड़े कुओं, गड्ढों एवं अन्य खतरनाक स्थलों को जाली एवं सुरक्षा कवच से ढकने का कार्य भी युद्धस्तर पर कराया जा रहा है। वहीं नदी, तालाब, पोखरों, झरनों, चेकडैमों एवं अन्य जलाशयों के आसपास चेतावनी बोर्ड और सुरक्षा संबंधी संकेतक लगाए जा रहे हैं, ताकि लोगों को संभावित खतरे के प्रति पहले से सचेत किया जा सके।
जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने जनपदवासियों से अपील करते हुए कहा है कि "खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों, पेड़ों तथा विद्युत पोलों से दूर रहें और अनावश्यक रूप से जलाशयों में प्रवेश न करें। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों पर विशेष निगरानी रखने की भी अपील की है। जिलाधिकारी ने कहा कि थोड़ी सी सावधानी और जागरूकता से बड़ी दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है तथा बहुमूल्य मानव जीवन की रक्षा की जा सकती है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन आपदा प्रबंधन एवं जनसुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए लगातार आवश्यक कदम उठा रहा है। जनसहभागिता और जागरूकता के माध्यम से ही आपदा जोखिम को कम किया जा सकता है और सुरक्षित समाज का निर्माण संभव है।"




