Sonbhadra News : शगुन की मौत का सच तलाशने नेशनल हॉस्पिटल पहुंचे ADM व CMO, अभिलेख कब्जे में लेकर रिकॉर्ड रूम पर जड़ा ताला
धर्मशाला रोड स्थित नेशनल हॉस्पिटल में ढाई वर्षीय मासूम शगुन की मौत का मामला अब गंभीर जांच के घेरे में पहुंच गया है। परिजनों द्वारा इलाज में लापरवाही के लगाए गए आरोपों और उसके बाद शनिवार को............

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3:28 PM, September 6, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । धर्मशाला रोड स्थित नेशनल हॉस्पिटल में ढाई वर्षीय मासूम शगुन की मौत का मामला अब गंभीर जांच के घेरे में पहुंच गया है। परिजनों द्वारा इलाज में लापरवाही के लगाए गए आरोपों और उसके बाद शनिवार को जिलाधिकारी के घेराव बाद प्रशासनिक और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने कार्यवाही तेज कर दी है।
जिलाधिकारी के निर्देश के बाद घर्मशाला स्थित नेशनल हॉस्पिटल पहुंचे सीएमओ डॉ0 रमेश कुमार मिश्रा, एडीएम न्यायिक, निजी अस्पतालों के प्रभारी नोडल अधिकारी डॉ0 कीर्ति आजाद बिंद, एसीएमओ डॉ0 प्रेमनाथ, पीएचसी केकराही अधीक्षक डॉ0 गुरु प्रसाद ने नेशनल हॉस्पिटल पहुंचकर घटना से जुड़े अभिलेख अपने कब्जे में ले लिए। इसके साथ ही बीएचटी समेत इलाज से संबंधित रिकॉर्ड रखने वाले रिकॉर्ड रूम को सील कर दिया। वहीं मौके पर मौजूद चिकित्सक डॉ0 आर0पी0 सिंह का बयान भी दर्ज किया।
डीएम कार्यालय पर प्रदर्शन के बाद तेज हुई कार्यवाही -
मामले को लेकर पीड़ित पक्ष ने शनिवार को को जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया था और सदर विधायक और जिलाधिकारी का घेराव भी किया था। प्रदर्शन के बाद मामला जिलाधिकारी के संज्ञान में आने के बाद उन्होंने एडीएम न्यायिक और सीएमओ की दो सदस्यीय जांच टीम गठित कर तीन दिनों में रिपोर्ट तलब किया है। वहीं जांच टीम गठित होते ही हरकत में आई टीम ने तुरंत नेशनल हॉस्पिटल पहुंच कर घटना से जुड़े अभिलेख अपने कब्जे में लेते हुए बीएचटी रखने वाले रिकॉर्ड रूम को सील कर दिया। इसके पश्चात हॉस्पिटल में मौजूद चिकित्सक डॉ0 आर0पी0 सिंह का बयान भी दर्ज किया।
अब रिकॉर्ड खोलेगा इलाज का पूरा सच -
अब जांच का सबसे अहम आधार अस्पताल में मौजूद वह रिकॉर्ड है, जिसमें शगुन के इलाज से जुड़ी पूरी जानकारी दर्ज है। बच्ची को अस्पताल में कब भर्ती किया गया, उसकी हालत उस समय कैसी थी, कौन-कौन सी जांच कराई गई, कौन सी दवाएं और इंजेक्शन दिए गए, उपचार के दौरान उसकी स्थिति कब बिगड़ी और गंभीर स्थिति में चिकित्सकों ने क्या कदम उठाए गए, इन सभी बिंदुओं की जांच की जाएगी। वहीं रिकॉर्ड रूम सील किए जाने के बाद अस्पताल के अभिलेखों से इलाज की पूरी टाइमलाइन सामने आने की उम्मीद है। जांच टीम यह भी देखेगी कि उपचार के दौरान निर्धारित चिकित्सकीय प्रक्रिया और प्रोटोकॉल का पालन किया गया था या नहीं।
"बहरहाल मासूम की मौत ने निजी अस्पतालों में इलाज और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किया है। ऐसे में अब लोगों की नजर इस बात पर है कि जांच टीम मामले की कितनी गहराई से पड़ताल करती है और उसकी रिपोर्ट में क्या सामने आता है। रिकॉर्ड रूम सील है, इलाज से जुड़े अभिलेख कब्जे में हैं और चिकित्सक का बयान भी दर्ज हो चुका है। ऐसे में अब जांच के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि शगुन की मौत के पीछे आखिर क्या हुआ था? यदि जांच में किसी स्तर पर चिकित्सकीय लापरवाही, नियमों की अनदेखी अथवा उपचार में गंभीर चूक सामने आती है तो दोषी के खिलाफ कार्यवाही तय करना स्वास्थ्य विभाग की अगली बड़ी चुनौती होगी। फिलहाल जांच प्रक्रिया जारी है। अब नेशनल हॉस्पिटल की जांच रिपोर्ट ही तय करेगी कि मासूम शगुन की मौत महज एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी या उसके इलाज में हुई किसी चूक ने 22 वर्षों में बाद सुरेंद्र के घर में गुंजी किलकारी को छीन ली।"




