Sonbhadra News : सीएमओ कार्यालय से चंद कदम दूर बदहाल प्रसव केंद्र, पानी-शौचालय तक नहीं... प्रसूताओं की जिंदगी से हो रहा खिलवाड़
स्वास्थ्य विभाग भले ही बेहतर चिकित्सा सेवाओं के बड़े-बड़े दावे करता हो, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पूरी तरह पोल खोल रही है। मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय से चंद कदमों की दूरी पर संचालित सरकारी.....

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7:05 PM, July 24, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । स्वास्थ्य विभाग भले ही बेहतर चिकित्सा सेवाओं के बड़े-बड़े दावे करता हो, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पूरी तरह पोल खोल रही है। मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय से चंद कदमों की दूरी पर संचालित सरकारी प्रसव केंद्र (पीपीसी) इन दिनों बदहाल व्यवस्थाओं का शिकार बना हुआ है। यहां प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं को इलाज से पहले बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि जिन प्रसूताओं और नवजातों की सुरक्षा की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग पर है, वहीं उन्हें अस्वच्छ और असुरक्षित माहौल में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है।
नगर के बीचोंबीच स्थित इस सरकारी प्रसव केंद्र में प्रसूता महिलाओं को पीने का स्वच्छ पानी तक उपलब्ध नहीं है। शौचालयों की हालत इतनी खराब है कि उनका उपयोग करना भी मुश्किल हो गया है। महिला वार्ड में लगा एयर कंडीशनर भी कई महीनों से बंद पड़ा है और सिर्फ शोपीस बनकर रह गया है। उमस और गर्मी के बीच नवजात शिशुओं और प्रसूताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सबसे गंभीर पहलू यह है कि प्रसूता महिलाओं को गंदगी से भरे शौचालय और बाथरूम का उपयोग करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। चिकित्सकीय दृष्टि से प्रसव के बाद संक्रमण का खतरा पहले से ही अधिक रहता है। ऐसी स्थिति में गंदगी और अस्वच्छ वातावरण में शौचालय का इस्तेमाल करना प्रसूताओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। संक्रमण फैलने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता, जो कई मामलों में जानलेवा भी साबित हो सकता है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी व्यवस्था सुधारने में गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं।
इतना ही नहीं, अस्पताल परिसर और उसके आसपास रात्रिकालीन सुरक्षा व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। मरीजों के तीमारदारों का आरोप है कि देर रात अस्पताल के आसपास नशेड़ी खुलेआम मंडराते रहते हैं। हैरानी की बात यह है कि अस्पताल से चंद कदमों की दूरी पर पुलिस चौकी होने के बावजूद असामाजिक तत्वों की गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पा रहा है। इससे प्रसूता महिलाओं, नवजात शिशुओं और उनके परिजनों में भय का माहौल बना रहता है। यह स्थिति स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ स्थानीय पुलिस की सतर्कता पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
मरीजों के तीमारदार सरफुद्दीन, सरिता और रुबीना बानो ने बताया कि "अस्पताल में न पीने के पानी की व्यवस्था है, न साफ-सुथरे शौचालय की। रात में सुरक्षा का भी कोई इंतजाम नहीं है। नशेड़ी अस्पताल के आसपास घूमते रहते हैं, जिससे महिलाओं और मरीजों के परिजनों में हमेशा डर बना रहता है।"
वहीं समाजसेवियों का कहना है कि "जब सीएमओ कार्यालय के बिल्कुल नजदीक स्थित सरकारी प्रसव केंद्र की यह स्थिति है, तो जिले के दूरदराज के स्वास्थ्य केंद्रों की हालत का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। करोड़ों रुपये खर्च होने और स्वास्थ्य सेवाओं के दावों के बावजूद प्रसूताओं को न्यूनतम सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।"
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ0 रमेश कुमार मिश्रा ने कहा कि "प्रसूता केंद्र में व्याप्त समस्याओं की जानकारी मिली है। सभी व्यवस्थाओं को प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द दुरुस्त कराया जाएगा। किसी भी प्रसूता को असुविधा नहीं होने दी जाएगी साथ ही रात में एक गार्ड को भी वहां तैनात किया जाएगा।"




