Sonbhadra News : अनजान शहर में भटक गया था 9 वर्षीय मासूम, चाइल्ड हेल्पलाइन के प्रयास से मां की गोद में लौटा 'आयुष'
रेनुकूट की सड़क पर अकेला बैठा नौ वर्षीय आयुष फूट-फूटकर रो रहा था। उसे न अपना गांव याद था और न ही वह अपने घर का सही पता बता पा रहा था। बस मां-बाप का नाम ही उसकी जुबान पर था। ऐसे में चाइल्ड हेल्पलाइन...

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7:28 PM, August 31, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । रेनुकूट की सड़क पर अकेला बैठा नौ वर्षीय आयुष फूट-फूटकर रो रहा था। उसे न अपना गांव याद था और न ही वह अपने घर का सही पता बता पा रहा था। बस मां-बाप का नाम ही उसकी जुबान पर था। ऐसे में चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की टीम ने न केवल उसे सुरक्षित संरक्षण दिया, बल्कि करीब एक सप्ताह की लगातार मेहनत के बाद उसके परिवार का पता लगाकर उसे फिर से मां की गोद तक पहुंचा दिया। मां-बेटे का मिलन हुआ तो दोनों की आंखों से आंसू छलक पड़े।
काउंसलिंग से खुली घर तक पहुंचने की राह -
जानकारी के अनुसार, 22 अगस्त 2026 को रेनुकूट में सड़क किनारे एक नौ वर्षीय बालक परेशान हालत में रोता हुआ मिला। सूचना मिलते ही चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की टीम के सदस्य धर्मवीर सिंह मौके पर पहुंचे और बालक को सुरक्षित रेस्क्यू किया। पूछताछ में बालक ने अपना नाम आयुष, पिता का नाम बजरंगी और माता का नाम लक्ष्मी देवी बताया, लेकिन अपने गांव अथवा घर का पता बताने में असमर्थ था। ऐसे में टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती बच्चे को उसके परिवार तक पहुंचाने की थी। टीम ने लगातार उसकी काउंसलिंग की और प्यार से बातचीत कर उसके घर व आसपास के स्थानों के बारे में जानकारी जुटाई। काफी प्रयास के बाद आयुष ने कुछ ऐसे स्थानों के नाम बताए, जिनके आधार पर टीम ने बिहार और झारखंड के विभिन्न जनपदों में संपर्क साधना शुरू किया।
एक-एक सुराग जोड़कर 'गया' तक पहुंची टीम -
बालक के बताए सुरागों को जोड़ते हुए चाइल्ड हेल्पलाइन टीम ने विभिन्न स्थानों पर संपर्क किया। करीब एक सप्ताह की लगातार मेहनत के बाद आखिरकार पता चला कि आयुष गया जनपद का रहने वाला है। इसके बाद परियोजना समन्वयक मुकेश कुमार सिंह ने संबंधित थाने से संपर्क स्थापित कर बालक के परिजनों को सूचना दी। बेटे के मिलने की खबर मिलते ही परिजन सोनभद्र पहुंचे। इसके बाद आयुष को नियमानुसार बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
मां को देखते ही आयुष की आंखों से छलके आंसू -
CWC के समक्ष वह पल बेहद भावुक कर देने वाला रहा, जब लंबे इंतजार के बाद आयुष की नजर अपनी मां पर पड़ी। मां को देखते ही आयुष उनसे लिपटकर रोने लगा। बेटे को सकुशल देखकर मां और अन्य परिजन भी भावुक हो उठे। कुछ ही पलों में वहां का माहौल भावनाओं से भर गया। परिजनों ने अपने बच्चे को सुरक्षित वापस दिलाने के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम का दिल से आभार जताया। बाल कल्याण समिति के आदेशानुसार सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद आयुष को उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।
किसी बच्चे को परिवार से मिला सकती है आपकी एक कॉल -
परियोजना समन्वयक मुकेश कुमार सिंह ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि "यदि कहीं कोई बच्चा अकेला, रोता हुआ, परेशान या किसी मुसीबत में दिखाई दे तो उसे नजरअंदाज न करें। तत्काल चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर सूचना दें। समय पर दी गई सूचना किसी मासूम को सुरक्षित उसके परिवार तक पहुंचाने में अहम कड़ी साबित हो सकती है।"




