Sonbhadra News : मेघों की मेहरबानी का इंतजार, बारिश न होने से बढ़ी किसानों की चिंता
जिले में मानसून की सुस्त चाल ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेत तैयार हैं, धान की नर्सरी तैयार है और किसान भी रोपाई के लिए पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने से खेती-किसानी की ......

बादलों की ओर टकटकी लगाए बैठा किसान........
sonbhadra
1:47 PM, July 16, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । जिले में मानसून की सुस्त चाल ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेत तैयार हैं, धान की नर्सरी तैयार है और किसान भी रोपाई के लिए पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने से खेती-किसानी की रफ्तार थम सी गई है। आसमान में बादल तो नजर आते हैं, मगर झमाझम बारिश का इंतजार अब भी खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में किसान उम्मीद और चिंता के बीच मौसम की हर करवट पर नजरें टिकाए हुए हैं।
धान की खेती पूरी तरह समय पर होने वाली बारिश पर निर्भर रहती है। जिले के अधिकांश किसानों ने धान की नर्सरी तैयार करने के साथ खेती की शुरुआती तैयारियों में अपनी मेहनत और पूंजी लगा दी है। लेकिन बारिश में हो रही देरी ने किसानों के सामने नई मुश्किल खड़ी कर दी है। खेतों में पानी नहीं पहुंचने से रोपाई का कार्य प्रभावित हो रहा है और किसान असमंजस की स्थिति में हैं।
बीज बचाएं या खेती की उम्मीद रखें?
कई किसान इस दुविधा में हैं कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो तैयार धान की नर्सरी खराब होने लगेगी। एक ओर बीज बचाने की चिंता है तो दूसरी ओर समय पर खेती नहीं होने का डर। गांव-गांव में किसानों के बीच यही चर्चा है कि आखिर अच्छी बारिश कब होगी और खेतों में रोपाई का काम कब शुरू हो सकेगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी असर की आशंका
सोनभद्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा कृषि पर आधारित है। सामान्य दिनों में इस समय तक खेतों में ट्रैक्टर, हल और किसानों की चहल-पहल दिखाई देती है, लेकिन इस बार बारिश की कमी के कारण कई क्षेत्रों में खेत सूने पड़े हैं। किसानों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी और लगातार वर्षा नहीं हुई तो धान की खेती पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है, जिसका प्रभाव पूरे कृषि सत्र और किसानों की आय पर भी पड़ेगा।
अब मौसम की मेहरबानी का इंतजार
फिलहाल जिले के किसानों की निगाहें पूरी तरह आसमान पर टिकी हैं। हर गुजरते दिन के साथ अच्छी बारिश की उम्मीद बनी हुई है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते मानसून सक्रिय हो गया तो खेती की रफ्तार फिर से पटरी पर लौट सकती है। अब सबकी निगाहें आने वाले दिनों के मौसम पर टिकी हैं और किसान इसी उम्मीद में हैं कि जल्द ही बादल मेहरबान होंगे और खेतों में नई उम्मीद के साथ रोपाई का काम शुरू होगा।




