Shahjahanpur news : पांच लाख की कथित घूस पर दरोगा सस्पेंड, सिपाही लाइन हाजिर; अब कोतवाल की भूमिका पर उठे सवाल
दुष्कर्म के एक मामले की विवेचना के दौरान आरोपी पक्ष से कथित तौर पर पांच लाख रुपये मांगने के मामले ने पुवायां थाने की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

shahjahanpur
5:29 PM, September 9, 2026
राहुल शुक्ला ब्यूरो
-- थाने में किसकी जानकारी में चल रहा था लेन-देन का खेल? कार्रवाई दरोगा-सिपाही तक सीमित क्यों, पर्यवेक्षण की भी हो जांच
-- पांच लाख की कथित घूस पर दरोगा सस्पेंड, सिपाही लाइन हाजिर; अब कोतवाल की भूमिका पर उठे सवाल
-- थाने में किसकी जानकारी में चल रहा था लेन-देन का खेल? कार्रवाई दरोगा-सिपाही तक सीमित क्यों, पर्यवेक्षण की भी हो जांच
पुवायां, शाहजहांपुर। दुष्कर्म के एक मामले की विवेचना के दौरान आरोपी पक्ष से कथित तौर पर पांच लाख रुपये मांगने के मामले ने पुवायां थाने की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायत और ऑडियो साक्ष्य के बाद एसपी सौरभ दीक्षित ने कस्बा इंचार्ज उपनिरीक्षक महेंद्र प्रताप सिंह को निलंबित कर दिया, जबकि उनके साथ आरोपी पक्ष के घर जाने वाले सिपाही सुमित कुमार को लाइन हाजिर किया गया है। सीओ पुवायां की जांच रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई।
मामला सामने आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल थाने की निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था को लेकर खड़ा हो रहा है। यदि विवेचना के दौरान इतनी बड़ी रकम की कथित मांग की जा रही थी और आरोपी पक्ष को धमकाने जैसे आरोप सामने आए, तो क्या इसकी भनक थाना स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों को नहीं थी?
सवाल यह नहीं कि कार्रवाई क्यों हुई, सवाल यह है कि कार्रवाई की सीमा कहां तक है?
दरोगा पर पांच लाख रुपये मांगने का आरोप सामने आया, सिपाही की भूमिका भी जांच में सामने आई और दोनों पर कार्रवाई हो गई। लेकिन अब यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि पूरे प्रकरण में थाना प्रभारी की निगरानी कितनी थी और विवेचना की प्रगति की जानकारी किस-किस अधिकारी को थी?
अगर थाना प्रभारी को पूरे घटनाक्रम की जानकारी नहीं थी तो पुलिस थाने की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़ा होता है। और यदि जानकारी थी तो फिर जांच का दायरा केवल दरोगा और सिपाही तक सीमित क्यों रहा—यह सवाल भी स्वाभाविक है।
हालांकि उपलब्ध आधिकारिक कार्रवाई में थाना प्रभारी पर किसी तरह की संलिप्तता का आरोप या कार्रवाई सामने नहीं आई है। इसलिए उनकी भूमिका पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच में पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी भी स्पष्ट की जानी चाहिए।
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दरोगा पर पांच लाख की कथित डील के आरोप के बाद पुवायां थाने की चौखट पर अब सिर्फ दो पुलिसकर्मियों की कार्रवाई की चर्चा नहीं है। सवाल यह भी है कि थाने में होने वाली हर विवेचना और कार्रवाई की निगरानी का जिम्मेदार तंत्र आखिर कितना जागरूक था?
पुलिस महकमे में भ्रष्टाचार के आरोपों पर कार्रवाई तभी प्रभावी मानी जाएगी, जब जांच व्यक्ति विशेष तक सीमित न रहकर पूरी जिम्मेदारी की कड़ी तक पहुंचे। अब निगाहें इस बात पर हैं कि इस मामले में आगे की जांच क्या केवल निलंबित दरोगा और लाइन हाजिर सिपाही तक रहती है या फिर पर्यवेक्षण की भूमिका भी जांच के दायरे में आती है।




