NEET परीक्षा रद्द, CBI जाँच के आदेश
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 को आखिरकार केंद्र सरकार ने रद्द कर दिया है। अब इस पूरे मामले की जांच CBI को सौंप दी गई है । इस फैसले से देशभर के 22 लाख से अधिक छात्र प्रभावित हुए

delhi
10:18 PM, May 12, 2026
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 को आखिरकार केंद्र सरकार ने रद्द कर दिया है। अब इस पूरे मामले की जांच CBI को सौंप दी गई है । इस फैसले से देशभर के 22 लाख से अधिक छात्र प्रभावित हुए हैं, जिन्होंने 3 मई 2026 को परीक्षा दी थी।
NEET-UG 2026 परीक्षा के आयोजन में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक की जांच के सिलसिले में CBI की एक विशेष टीम जयपुर स्थित SOG (स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप) के दफ़्तर पहुंची है।
NEET परीक्षा रद्द होने पर JDU नेता नीरज कुमार ने NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने पर कहा, "राष्ट्रीय स्तर पर मेडिकल परीक्षा आयोजित की जाती है और NEET के आधार पर उसमें चयन होता है। गड़बड़ी की शिकायत मिली और कार्रवाई हुई, उसके बावजूद तंत्र में कोई न कोई कमजोरी है जिसके कारण ऐसी घटना हुई। केंद्र सरकार ने इसे अविलंब रद्द करने का फैसला लिया, साथ ही साथ यह भी तय किया कि जिन छात्रों ने परीक्षा दी है, फॉर्म भरने के दौरान उनके पैसे दोबारा नहीं लगेंगे। लेकिन समय तो उनका जाया हुआ ही। ऐसी स्थिति में CBI जांच करेगी... बच्चों का भविष्य सुरक्षित और संरक्षित रहे, इसकी गारंटी करना सरकार का दायित्व है... हम समझते हैं कि सरकार का तंत्र इतना मजबूत है कि दोषी पर कार्रवाई भी होगी और मुक्कम्मल व्यवस्था प्रतियोगिता परीक्षा का आयोजित हो..."
भाजपा नेता आर.पी. सिंह ने NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने पर कहा, "सचमुच खेद है कि NEET का पेपर लीक हुआ है, इसमें CBI की जांच बैठी है। हम अपेक्षा करते हैं कि CBI जांच करके, जो भी दोषी होगा उसे कड़ी से कड़ी सजा दिलाएगी।"
शिक्षक और यूट्यूबर खान सर ने NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने पर कहा, "NEET पेपर रद्द होना लाखों छात्रों के आत्मविश्वास के साथ खिलवाड़ है, उनका कॉन्फिडेंस तोड़ा जा रहा है। सबसे दुर्भाग्यवश बात यह है कि 2 साल पहले 2024 में भी ऐसी ही घटनाएं हुई थी। CBI जांच हुई, जिसका कोई नतीजा नहीं निकला। जिससे उनका मनोबल बढ़ गया और उन्होंने ऐसा फिर से किया। लाखों बच्चों का भविष्य इससे खराब होता है... सबसे हास्यास्पद बात यह है कि इसकी जानकारी किसी एजेंसी ने नहीं दी बल्कि इसकी जानकारी सबसे पहले बच्चों ने सरकार के पास पहुंचाई... सरकार की एजेंसी को यह सबसे पहले पता चलना चाहिए... NTA का नाम 'नेवर ट्रस्टेबल एजेंसी' होना चाहिए... इतनी घटिया व्यवस्था है और इसकी जांच CBI को दी गई है... जब तक उन बच्चों की MBBS की पढ़ाई पूरी होगी तब तक CBI किसी नतीजे पर आएगा। सुप्रीम कोर्ट के किसी रिटायर्ड जज को इसका ऑबजर्वर बनाना चाहिए और एक निश्चित समय सीमा के अंदर जो जिम्मेदार है उसे कड़ी सजा होनी चाहिए... प्रधानमंत्री को इसमें व्यक्तिगत रूप से शामिल होना चाहिए और उन लोगों को कड़ी से कड़ी सजा दिलानी चाहिए..."




