अयोध्या से लेकर सोनभद्र तक भरोसे का कत्ल, सोनभद्र में भी करोड़ों की लूट, जांच होगी तो होंगे कई बेनकाब
जहाँ इन दिनों पूरे देश में राम मन्दिर में चढ़ावा चोरी की चर्चा है । लेकिन लोगों को सीएम योगी के जांच पर भरोसा है वहीं प्रदेश में अधिकारी व्यापारियों के साथ मिलकर सीएम योगी के ही विभाग में सेंध लगा दी।

sonbhadra
4:07 PM, June 19, 2026
शांतनु कुमार
सोनभद्र। जहाँ इन दिनों पूरे देश में राम मन्दिर में चढ़ावा चोरी की चर्चा है । लेकिन लोगों को सीएम योगी के जांच पर भरोसा है वहीं प्रदेश में अधिकारी व्यापारियों के साथ मिलकर सीएम योगी के ही विभाग में सेंध लगा दी है। सेंध भी हल्की-फुल्की नहीं बल्कि करोड़ों की।
मामला सोनभद्र का है, जहाँ खनन विभाग से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया जो हैरान करने वाला है।
दरअसल सोनभद्र में आर.के. ट्रांसपोर्ट एंड कंस्ट्रक्शन्स लिमिटेड ने पोस्ट मानसून रीप्लेस्नेमेंट स्टडी रिपोर्ट भेजकर जिलाधिकारी को बताया कि खेवंधा गांव में आराजी संख्या 246 (खंड-द) में रेणु नदी के किनारे 6 हेक्टेयर क्षेत्र की बालू/मोरम खनन लीज है। जिसमें कुल 6 हेक्टेयर में से मात्र 1.218 हेक्टेयर क्षेत्र ही खनन योग्य है, जिसमें केवल 32,886 घन मीटर बालू उपलब्ध है। अतः उन्हें 32,886 घन मीटर बालू खनन करने की अनुमति दी जाय। लेकिन खनन विभाग ने कंपनी को 90,000 घन मीटर बालू खनन की अनुमति दे दी। खनन विभाग के अधिकारी की दलील है कि कंपनी से उनकी बातचीत हुई थी, जिसके बाद ही 90,000 घन मीटर बालू खनन की अनुमति दी गयी है।
ऐसे में आरोप है कि जब खुद खनन व्यवसायी jiladhi को पत्र लिखकर 32,886 घन मीटर बालू खनन करने की अनुमति मांग, रहा है तो खनन विभाग सिर्फ वार्ता कर ज्यादे खनन की अनुमति कैसे दे दी।
ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या खनन विभाग खुद अवैध खनन को बढ़ावा दे रहा है।
आरोप तो यह भी है कि कंपनी ने जनवरी 2026 से मई 2026 तक 64,000 घन मीटर (MM-11) का शुल्क जमा कर लगभग 56,111 घन मीटर बालू का परिवहन भी कर लिया है, जो पोस्ट मानसून रीप्लेस्नेमेंट स्टडी रिपोर्ट में आकलित मात्रा से कहीं अधिक है।
बताया जा रहा है कि खनन विभाग यही लाभ मे0 ओमैक्स मिनरल प्राइवेट लि0 को भी दिया है। जिससे सरकार को करोड़ों का चूना लगा है।
जिस तरह से अयोध्या राम मन्दिर में भरोसे का कत्ल हुआ है उसी प्रकार सीएम योगी के विभाग खनन में भी भरोसे का कत्ल हो रहा है। अधिकारी और व्यापारी का सिंडकेट मिलकर सीएम योगी के विभाग में सेंधमारी कर रहे हैं।
यहाँ सवाल यह उठता है कि जब कंपनी के पास केवल 32,886 घन मीटर की ही खनन योग्य मात्रा उपलब्ध थी, तो विभाग ने 90,000 घन मीटर की अनुमति कैसे दे दी। आखिर यह अवैध खनन कराने की खुली परमिशन के लिए जिम्मेदार कौन है।
बहरहाल सीएम योगी को राम मन्दिर की तरह खुद के विभाग पर भी निगरानी करनी चाहिए और यहाँ भी उच्च स्तरीय जांच बिठाकर जांच करवानी चाहिए ताकि असली गुनाहगार पर कार्यवाही हो सके।




