दाम्पत्य जीवन में आने वाले संकट को दूर करने के लिए सुहागिनों ने रखा वट सावित्री का व्रत
प्रातःकाल से ही बड़ी संख्या में व्रती महिलाओं का हुजूम वट वृक्ष के नीचे पहुंच पूजन अर्चन किया

सोनभद्र
8:50 PM, May 16, 2026
धर्मेन्द्र गुप्ता (संवाददाता)
विंढमगंज (सोनभद्र)। वट सावित्री व्रत को करवा चौथ के समान ही माना जाता है ।इस व्रत को संपन्न कर सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण बचाए थे। यह व्रत सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए रखती हैं ।इस व्रत के प्रताप से पति पर आए संकट दूर हो जाते हैं और दांपत्य जीवन में खुशियां आती है।
इसी क्रम में थाना परिसर से सटे बुटबेढवा में हनुमान मंदिर व सलैयाडीह ग्राम पंचायत में काली मंदिर व हनुमान मंदिर के पुजारियों द्वारा वट सावित्री व्रत की कथा सुनाया गया।
शनिवार को बट सावित्री पूजा के मौके पर शहरी क्षेत्रों के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों की सभी सनातनी सुहागिन महिलाओं ने सुबह से दोपहर बाद तक इस संपूर्ण पृथ्वी पर अटल विश्वास का प्रतीक माने जाने वाले परमात्म स्वरूप बट वृक्ष की पूरे विधि विधान से पूजा अर्चना कर अपने पति के लंबी उम्र की कामना की।
वहीं महुली में भी व्रती महिलाओं ने पूजन अर्चन किया। कथावाचक ने बताया कि बट सावित्री पूजा यह स्त्रियों का महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन सत्यवान सावित्री तथा यमराज की पूजा की जाती है। सावित्री ने इस व्रत के प्रभाव से अपने मृतक पति सत्यवान को धर्मराज से छुड़ाया था। यह व्रत पति के दीर्घायु के अलावा यह व्रत संतान प्राप्ति के लिए भी उचित बताया जाता है।बट सावित्री पूजा के दिन सुहागिन स्त्रियां जल से वट वृक्ष को सींच कर तने को चारों ओर सात बार कच्चा धागा लपेट कर परिक्रमा करती है। साथ ही पंखे से वट वृक्ष को हवा करके इसके बाद सत्यवान−सावित्री की कथा सुनती है।




