राम-सीता विवाह प्रसंग सुन श्रद्धालु हुए भावविभोर, जयकारों से गूंजा मेड़र माता मंदिर परिसर
मेड़र माता मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के चौथे दिन राम-सीता विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए।

sonbhadra
9:48 PM, July 24, 2026
घनश्याम पांडेय/विनीत शर्मा (संवाददाता)
चोपन। मेड़र माता मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के चौथे दिन राम-सीता विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। मंगलगीतों और "सीता-राम" के जयकारों से पूरा पंडाल भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो उठा। कथावाचक दिलीप कृष्ण भारद्वाज ने श्रीराम-सीता विवाह की कथा सुनाते हुए बताया कि राजा जनक के दरबार में भगवान शिव का दिव्य धनुष रखा था। एक दिन माता सीता ने महल की सफाई करते समय उस धनुष को सहजता से उठाकर दूसरी जगह रख दिया। यह देखकर राजा जनक आश्चर्यचकित रह गए, क्योंकि उस धनुष को कोई भी हिला तक नहीं सकता था। तभी उन्होंने प्रतिज्ञा की कि जो वीर इस धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, उसी से वे अपनी पुत्री सीता का विवाह करेंगे। इसके बाद राजा जनक ने स्वयंवर का आयोजन कर सभी राजा-महाराजाओं को आमंत्रित किया। स्वयंवर में उपस्थित अनेक पराक्रमी राजाओं ने धनुष उठाने का प्रयास किया, लेकिन कोई भी सफल नहीं हो सका। अंततः गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से भगवान श्रीराम ने धनुष उठाया और जैसे ही उस पर प्रत्यंचा चढ़ाने लगे, धनुष टूट गया। इसके बाद पूरे वैदिक रीति-रिवाज और हर्षोल्लास के साथ भगवान श्रीराम और माता सीता का विवाह संपन्न हुआ। जैसे ही माता सीता ने भगवान श्रीराम के गले में वरमाला डाली, देवताओं ने पुष्पवर्षा कर इस दिव्य मिलन का स्वागत किया।
कथा के दौरान चोपन सहित पूरे सोनभद्र से बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के आयोजक शिवकुमार पहाड़ी बाबा रहे। संरक्षक मंडल में राजा मिश्र, नागेश्वर सिंह गौड़, सुनील सिंह, श्यामाचरण गिरी, संतोष साहनी, राजकुमार यादव (पप्पू), अजय साहनी, राजकुमार साहनी, रविशंकर साहनी, महेंद्र गोंड, राजेंद्र, संदीप, अनिल चौरसिया, रमाशंकर निषाद एवं श्रवण सहित अन्य लोग मौजूद रहे। कथा में हजारों श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर धर्मलाभ प्राप्त किया।




