कॉलेज में दवाएं जलाए जाने का मामला : CMO के पत्र लिखने के चार दिन बाद भी शिक्षा विभाग ने नहीं शुरू की जाँच
कॉलेज प्रशासन द्वारा इतनी बड़ी लापरवाही सामने आने के बाद भी शिक्षा विभाग अब तक मुक दर्शक बन कर बैठा हुआ है, जो क्षेत्र में चर्चा का विषय बना है।

sonbhadra
7:33 AM, November 17, 2024
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• शिक्षा विभाग का उदासीन रवैया क्षेत्र में बना चर्चा का विषय
• क्षेत्रवासियों ने की जिलाधिकारी से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग
सोनभद्र । सरकार द्वारा चलाए जा रहे जनकल्याणकारी योजनाओं में विभाग किस कदर लापरवाह बरती जाती है इसकी बानगी आपको जनपद सोनभद्र में देखने को मिल जाएगी। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत सभी स्कूलों में बच्चों के लिए कीड़े मारने की दवा और आयरल की गोली खिलाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की तरफ से सभी विद्यालयों को प्रति वर्ष दी जाती है लेकिन जनपद सोनभद्र में दवाएं बच्चों को खिलाये जाने के बजाय जला दी गयी। कॉलेज प्रशासन द्वारा इतनी बड़ी लापरवाही सामने आने के बाद भी शिक्षा विभाग अब तक मुक दर्शक बन कर बैठा हुआ है, जो क्षेत्र में चर्चा का विषय बना है।
बताते चलें कि पिछले रविवार को इंटर कॉलेज परिसर के पार्किंग क्षेत्र में काफी मात्रा में दवाएं जलाने की बात सामने आई थी। इसमें कीड़ी मारने की दवा एल्बेंडाजोल व छात्राओं में वितरित की जाने वाली आयरन की गोली शामिल थी, वहीं जलाई गई दवाओं के रैपर पर एक्सपायर होने की तिथि दिसंबर 2024 अंकित थी। जिससे यह स्पष्ट है कि बच्चों को यह दवाएं कभी दिया ही नहीं गया।
वहीं स्वास्थ्य विभाग की टीम की जाँच में सीएमओ ने बताया कि पुरे प्रकरण में प्रधानाचार्य और संबंधित जिम्मेदार की लापरवाही स्पष्ट हो रही है। जिसके बाद CMO ने DIOS और BSA को पत्र लिख दो दिनों में जाँच कर दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही कर अवगत कराने को कहा था लेकिन चार दिन बाद भी शिक्षा विभाग ने अपनी जाँच शुरू नहीं की। वहीं जाँच के नाम पर शिक्षा विभाग का लचर रवैया क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। वहीं क्षेत्रवासियों ने दबी जुबान में कहा कि विद्यालय प्रबंधन के रसूख के आगे शिक्षा विभाग बौना साबित होता है। शिक्षा विभाग समय बीता कर पुरे मामले को ठंडे बस्ते में डालने का प्रयास कर रहा है। वहीं क्षेत्रवासियों ने इस मामले में जिलाधिकारी से हस्तक्षेप करने की मांग की है।
वहीं इस संबंध में ज़ब जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और डीआईओएस से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो दोनों अधिकारी अपने कार्यालय में मौजूद नहीं मिले। उनके कर्मियों नें बताया कि वह तहसील दिवस में गए हैं।
बहरहाल पुरे मामले में शिक्षा विभाग का लचर रवैया क्षेत्रवासियों के जेहन में तमाम सवाल पैदा कर रहा है। अब देखना दिलचस्प होगा कि शिक्षा विभाग पुरे मामले की जाँच करता है या पुरे मामले को ठंडे बस्ते में डालने के लिए जाँच के नाम पर समय का मरहम लगाता है।




