Sonbhadra News: पंचायत विकास योजना एवं ई-ग्राम स्वराज पर प्रशिक्षण में कई सचिवों के ना पहुंचने पर उठे सवाल
राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान योजना के अंतर्गत सोमवार को विकासखंड चोपन सभागार में पंचायत विकास योजना (PDP) एवं ई-ग्राम स्वराज विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

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7:20 PM, July 13, 2026
घनश्याम पांडे/विनीत शर्मा (संवाददाता)
चोपन (सोनभद्र) । राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान योजना के अंतर्गत सोमवार को विकासखंड चोपन सभागार में पंचायत विकास योजना (PDP) एवं ई-ग्राम स्वराज विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह प्रशिक्षण उपनिदेशक पंचायत, जिला पंचायत राज अधिकारी तथा खंड विकास अधिकारी कार्यालय के निर्देशन में आयोजित हुआ, जिसमें विकासखंड की 36 ग्राम पंचायतों के पंचायत सहायकों एवं पंचायत सचिवों ने भाग लिया। हालांकि सभी सचिव के नहीं पहुंचने पर पंचायत साहयकों ने आवाज़ उठाई। प्रशिक्षण का उद्देश्य पंचायत प्रतिनिधियों एवं पंचायत सहायकों को ग्राम पंचायत विकास योजना तैयार करने, ग्राम सभाओं का प्रभावी संचालन, ग्रामीणों की सहभागिता बढ़ाने, योजनाओं की प्राथमिकता तय करने, वित्तीय प्रबंधन तथा ई-ग्राम स्वराज पोर्टल के बेहतर उपयोग के संबंध में जानकारी देना था। प्रशिक्षकों ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के बीच समन्वय स्थापित कर ग्राम स्तर पर विकास कार्यों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। प्रशिक्षण में शामिल पंचायत सहायक अंकित कुमार ने बताया कि पंचायत सहायकों को प्रशिक्षण के माध्यम से नई जानकारियां दी जा रही हैं, ताकि वे अपनी-अपनी ग्राम पंचायतों में योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित कर सकें। हालांकि उन्होंने कहा कि इससे पहले वर्ष 2025 तथा वर्ष 2026 की शुरुआत में भी इसी प्रकार के प्रशिक्षण आयोजित किए जा चुके हैं। उनके अनुसार प्रशिक्षण उपयोगी है, लेकिन ग्राम स्तर पर नियमों के अनुरूप कार्यान्वयन सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।
अंकित कुमार ने कहा कि नियमों के अनुसार ग्राम पंचायत विकास योजना तैयार करने से पहले विधिवत ग्राम सभा आयोजित होना और आवश्यक कोरम पूरा होना अनिवार्य है। उनका आरोप था कि कई स्थानों पर ग्राम सभा की औपचारिक बैठक किए बिना ही कार्ययोजनाएं तैयार कर ली जाती हैं। यदि इसकी निष्पक्ष जांच कराई जाए तो बैठक की कार्यवाही, फोटो, तिथि और समय का रिकॉर्ड उपलब्ध होना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि ग्राम पंचायत की कार्ययोजना तैयार करने की मुख्य जिम्मेदारी ग्राम सचिव और ग्राम प्रधान की होती है, जबकि पंचायत सहायक उनके निर्देशन में कार्य करता है। यदि सचिव प्रशिक्षण में उपस्थित न हों या ग्राम सभाओं के संचालन में सक्रिय भूमिका न निभाएं, तो प्रशिक्षण में मिली जानकारी को व्यवहार में लागू करना कठिन हो जाता है। उन्होंने पंचायत सहायकों के मानदेय और सुविधाओं का मुद्दा भी उठाते हुए कहा कि वर्तमान में उन्हें केवल छह हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है तथा नियुक्ति के बाद विभिन्न प्रशिक्षणों में भाग लेने के बावजूद आज तक यात्रा भत्ते का भुगतान नहीं किया गया है। वहीं पंचायती राज विभाग के मंडल ट्रेनर विनय कुमार चौबे ने कहा कि वर्तमान प्रशिक्षण पूर्व के प्रशिक्षणों से अलग है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बार पंचायत विकास योजना (PDP) और ई-ग्राम स्वराज के नए प्रावधानों, ऑनलाइन कार्यप्रणाली, वित्तीय प्रबंधन तथा मूल्यांकन प्रणाली पर विशेष रूप से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि उनका दायित्व केवल प्रशिक्षण देना है। पंचायत सचिवों की उपस्थिति या अनुपस्थिति तथा प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े विषय संबंधित अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। उन्होंने कहा कि शासन द्वारा निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार ही पंचायत विकास योजना तैयार की जाती है। यदि किसी पंचायत द्वारा निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया जाएगा तो उसे मूल्यांकन में निर्धारित अंक भी प्राप्त नहीं होंगे। प्रशिक्षण सुबह 10:30 बजे से शाम 4 बजे तक चला, जिसमें प्रतिभागियों को योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए तकनीकी एवं व्यवहारिक जानकारी प्रदान की गई। कार्यक्रम के दौरान पंचायत स्तर पर योजनाओं के पारदर्शी और प्रभावी संचालन पर विशेष जोर दिया गया।




