Sonbhadra News : सोनभद्र में मिली ढाई अरब वर्ष पुरानी चट्टानें, शोध छात्रों ने विभिन्न क्षेत्रों से एकत्र किए नमूने
उत्तर प्रदेश के सोनभद्र और छत्तीसगढ़ के रामानुजगंज क्षेत्र की लो-टू-मीडियम ग्रेड रूपांतरित चट्टानें लगभग ढाई अरब वर्ष (2.5 बिलियन वर्ष) पुरानी पाई गई हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय के शोध छात्रों.....

सोनभद्र में चट्टानों के नमूने एकत्र करते शोध छात्र.....
sonbhadra
8:56 AM, January 3, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । उत्तर प्रदेश के सोनभद्र और छत्तीसगढ़ के रामानुजगंज क्षेत्र की लो-टू-मीडियम ग्रेड रूपांतरित चट्टानें लगभग ढाई अरब वर्ष (2.5 बिलियन वर्ष) पुरानी पाई गई हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय के शोध छात्रों द्वारा किए गए अध्ययन में दोनों क्षेत्रों की चट्टानों की संरचना, खनिजीय लक्षण और भूवैज्ञानिक इतिहास में उल्लेखनीय समानता सामने आई है।
शोध छात्रों ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों के चट्टानों का एकत्र किया नमूना -
शोध दल ने सोनभद्र के म्योरपुर ब्लॉक अंतर्गत रनटोला स्थित जमतिहवा नाला, मुर्धवा और खांड पत्थर नाला, जबकि इससे पहले छत्तीसगढ़ के रामानुजगंज क्षेत्र की नदियों व पहाड़ियों से नमूने एकत्र किए। शोध छात्रा फिरदौस और गरिमा मिश्रा के अनुसार, दोनों स्थानों की चट्टानें लो-टू-मीडियम ग्रेड रूपांतरण से निर्मित हैं, जिनकी लैब में विस्तृत जांच की जाएगी।
2.5 अरब वर्ष पुरानी हैं झिरगाडंडी की चट्टानें -
लखनऊ विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग के प्रो0 डॉ0 विभूति राय ने बताया कि "चोपन ब्लॉक के झिरगाडंडी की ग्रेनाइटिक चट्टानें सोन वैली क्षेत्र की सबसे प्राचीन चट्टानों में शामिल हैं, जिनकी आयु लगभग ढाई अरब वर्ष है। उन्होंने कहा कि इनसे पुरानी चट्टानें इस क्षेत्र में नहीं मिलतीं और इनका साम्य सिंहभूमि व अरावली क्रेटन की चट्टानों से देखा जाता है।"
आर्कियन और प्रारंभिक प्रोटेरोज़ोइक काल में बनीं ये चट्टानें -
प्रो0 डॉ0 विभूति राय के अनुसार, "भले ही सोनभद्र और रामानुजगंज अलग-अलग राज्यों में स्थित हों, लेकिन भूवैज्ञानिक दृष्टि से दोनों एक ही प्राचीन धरती की कहानी कहते हैं। रामानुजगंज क्षेत्र छोटानागपुर पठार और उससे जुड़े प्राचीन क्रेटन भू-खंड का हिस्सा है, जहां ग्रेनाइट, गनीस और अन्य क्रिस्टलाइन चट्टानें प्रमुख हैं। इसी तरह सोनभद्र के झिरगाडंडी क्षेत्र में भी क्वार्टजाइट और गनीसिक संरचनाएं व्यापक रूप से देखी जाती हैं। ये चट्टानें आर्कियन और प्रारंभिक प्रोटेरोज़ोइक काल में बनीं, जब पृथ्वी की सतह स्थिर होना शुरू हुई थी।"
वैज्ञानिक अध्ययन, खनिज, पर्यावरण और भूमि उपयोग की दृष्टि से महत्वपूर्ण है यह खोज -
भूविज्ञानियों का मानना है कि "ढाई अरब वर्ष पुराने इस भूगर्भीय ढांचे पर समय-समय पर धरती की हलचल, मोड़ और दरारें बनीं, लेकिन मूल चट्टानी आधार आज भी सुरक्षित है। यहीं कारण है कि दोनों क्षेत्रों में संरचनात्मक और खनिजीय समानताएं स्पष्ट दिखाई देती हैं। यह खोज वैज्ञानिक अध्ययन के साथ-साथ खनिज, पर्यावरण और भूमि उपयोग की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।"
1.5 अरब वर्ष पुरानी है लोरिक की चट्टान -
प्रो0 विभूति राय के अनुसार "लोरिक की चट्टानें लगभग 1.5 अरब वर्ष पुरानी हैं, जबकि उसके नीचे पाए जाने वाले फॉसिल्स की आयु करीब 1.6 अरब वर्ष है। मुर्धवा और जमतिहवा नाला की चट्टानें लगभग 1.8 अरब वर्ष पुरानी बताई गई हैं। इस क्रम में कुछ स्थानों पर खनिज प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देने लगते हैं। परसोंई क्षेत्र में कायांतरित चट्टानों में खनिज ऊपर की सतह पर उभरते दिखते हैं, जहां मिनी रत्न जैसे पत्थर भी पाए जाते हैं। "



