सोनभद्र

पारस्परिक तबादल नीति : किसी ने बताया मिलेगी राहत तो कोई बोला ऊंट के मुँह में जीरा

आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । गर्मी व सर्दियों की छुट्टियों में परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों के जिले के अंदर पारस्परिक तबादले की शासन स्तर से मंजूरी मिलने के बाद शिक्षक संगठनों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दी है। किसी ने इसे शिक्षकों के लिए राहत की खबर बताया तो किसी ने इसे ऊंट के मुंह में जीरा करारा दिया है।

प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष योगेश कुमार पांडेय ने कहा कि “भौगोलिक दृष्टिकोण से काफी दुर्गम सोनभद्र में पारस्परिक तबादले से शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद कम ही है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों के शिक्षकों का तबादला ग्रामीण क्षेत्रों में और शहरी क्षेत्रों के शिक्षकों का शहरी क्षेत्रों में ही होना है। इससे एकल विद्यालयों प्राथमिक शिक्षक संघ शासन से अंतर्जनपदीय तबादला नीति लागू करने की मांग करता है।”

यूटा के जिलाध्यक्ष शिवम अग्रवाल ने कहा कि “कई वर्षों से दुरस्त विद्यालयों में कार्य कर रहे शिक्षकों को पारस्परिक तबादला से काफी सहूलियत मिलेगी। साथ ही शिक्षकों के अटैचमेंट पर भी रोक लग सकेगी।”

वहीं महिला शिक्षक सशक्तिकरण संघ की प्रदेश सचिव शीतल दहलान ने पारस्परिक तबादला नीति को शिक्षकों के लिए ऊंट के मुंह में जीरा करार दिया है। उन्होंने बताया कि महिला शिक्षकों को इससे बहुत लाभ नहीं मिलने वाला है, सिर्फ 8 या 10 महिला शिक्षक ही इससे लाभान्वित हो पाएंगी। अपने महिला शिक्षकों का अंतर्जनपदीय स्थानान्तरण नीति से ही भला हो सकेगा।”

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