UP News : उत्तर प्रदेश राज्य की खनिज क्षेत्र में बदलती तस्वीर
सचिव एवं निदेशक भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग माला श्रीवास्तव ने बताया कि उत्तर प्रदेश भारत के उत्तरी भाग में देश का एक प्रमुख भाग है जो मुख्यतः इंडो-गैंजेटिक प्लेन में अवस्थित है।

lucknow
5:37 PM, September 29, 2026
लखनऊ । सचिव एवं निदेशक भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग माला श्रीवास्तव ने बताया कि उत्तर प्रदेश भारत के उत्तरी भाग में देश का एक प्रमुख भाग है जो मुख्यतः इंडो-गैंजेटिक प्लेन में अवस्थित है। इसके दक्षिण भाग में बुन्देलखण्ड एवं विन्ध्य क्षेत्र में पठारी एवं चट्टानी संरचनायें पायी जाती है, जिस कारण यहां मुख्यतः स्वस्थानीय किस्म की चट्टानों से खण्डा, गिट्टी, बोल्डर आदि का खनन व उत्पादन होता रहा है। वर्ष 2022 से विभिन्न अन्वेषण एजेंसिओं यथा भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, उत्तरी क्षेत्र लखनऊ, एमईसीएल, नागपुर आदि के प्रयासों से फाॅस्फोराईट, लौह अयस्क, चूना पत्थर खनिजों की खोज की गयी जिसके फलस्वरूप वर्ष 2022 से 2026 तक लगभग 4 वर्षो में ही फाॅस्फोराईट, लौह अयस्क व लाइमस्टोन के खनन पट्टों को ई-निविदा सह ई-नीलामी की प्रक्रिया अपनाते हुए निजी निवेशको से बिड प्राप्त करते हुए खनन पट्टों के लिए आशय पत्र निर्गत किए गए हैं। इनमें से 02 फाॅस्फोराईट खनिज के ब्लाॅक ऐसे है जिन्हें कम्पोजिट लाइसेंस हेतु ई-निविदा सह ई-नीलामी के माध्यम से आवंटित किया गया था और आवंटी कम्पनियों द्वारा अन्वेषण कार्य पूर्ण करते हुए नियमानुसार खनन पट्टे हेतु आवेदन प्रस्तुत किया और अब उन्हें खनन पट्टे हेतु आशय पत्र भी नियमानुसार निर्गत कर दिया गया है।
पर्यावरण स्वच्छता प्रमाण पत्र व वन अनापत्तियां राज्य सरकार व भारत सरकार के स्तर से प्राप्त हो जाने के उपरान्त इन खनिजों का उत्पादन उत्तर प्रदेश राज्य में प्रारम्भ होगा। इससे राजस्व स्रोतों की बढ़ोत्तरी होगी, निवेश के साथ उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा क्योंकि इन खनिजों का उपयोग उर्वरक उद्योग, स्टील उद्योग, सीमेन्ट उद्योग आदि में किया जाता है।
उत्तर प्रदेश राज्य में मुख्य खनिज यथा लौह अयस्क, ग्लूकोनाईट, दुर्लभ मृदा तत्व, स्वर्ण धातु के ब्लाॅकों के सम्बन्ध में ई-निविदा सह ई-नीलामी के माध्यम से कम्पोजिट लाइसेंस हेतु आशय पत्र निर्गत है। इन आशय पत्र धारको द्वारा किये जा रहे अन्वेषण कार्यो पर सत्त निगरानी रखी जा रही है ताकि भविष्य में भी इन क्षेत्रों में भी खनिज उत्पादन प्रारम्भ हो सके।
प्रदेश के विकास की दिशा में राज्य को और गति प्रदान करने के लिए राज्यकीय अन्वेषण एजेंसिओं भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, उत्तरी क्षेत्र लखनऊ के अतिरिक्त निजी कम्पनियां यथा जियो एक्सपोर, जियोवेल आदि भी तेजी से उत्तर प्रदेश में खनिज अन्वेषण हेतु आगे आ रही है।
प्रदेश में मुख्य खनिजों के अन्वेषण की परियोजनाओं को गति प्रदान करने, खनिजों के नये भण्डार खोजे जाने की सम्भावनाओं व तकनीकी विचार विमर्श के लिए सचिव, भूतत्व एवं खनिकर्म की अध्यक्षता मे गठित राज्य भूवैज्ञानिक कार्यकारिणी परिषद की बैठक मंगलवार को खनन निदेशालय में सम्पन्न हुयी, जिसमें भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय, भारत सरकार, मिनरल एक्सप्लोरेशन एण्ड कंसल्टेंसी लिमिटेड (डम्ब्स्),नागपुर, भारत सरकार का उपक्रम, भारतीय खनिज उद्योग महासंघ (थ्प्डप्), नई दिल्ली, एशोसिएट प्रोफेसर के लखनऊ विश्वविद्यालय, नियोजन विभाग, उत्तर प्रदेश शासन एवं भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के अधिकारीगण उपस्थित रहे। परिषद में भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग द्वारा संचालित अन्वेषण की परियोजनाओं की वर्ष 2025-26 की प्रगति आख्या एवं सत्र 2026-27 के लिए प्रस्तावित अन्वेषण परियोजनाओं की कार्ययोजना प्रस्तुत की गयी। बैठक में की गयी चर्चा के अनुसार प्रदेश के जनपद ललितपुर, झांसी व सोनभद्र में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण उत्तरी क्षेत्र द्वारा वर्ष 2026-27 में 15 परियोजनाएं, जनपद झांसी, महोबा व ललितपुर में भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग, उ0प्र0 की 04 परियोजनाएं, जनपद झांसी में मिनरल एक्सप्लोरेशन एण्ड कंसल्टेंसी लिमिटेड, नागपुर की 02 परियोजनाएं एवं जनपद सोनभद्र में परमाणु ऊर्जा विभाग की 03 परियोजनाए संचालित की जा रही है। इन परियोजनाओं में अन्वेषण कार्य पूर्ण होने के उपरान्त प्रदेश में और अधिक मुख्य खनिजों के ब्लाॅक खोजे जा सकेगें जिनका उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आॅक्शन किये जाने पर खनिज आधारित उद्योगों की स्थापना सम्भव हो सकेगा।
इस प्रकार उत्तर प्रदेश सरकार की दूरदर्शी नितियों से आने वाले दिनों में निवेश व रोजगार बढ़ाने की आधारशिला रखी जा रही है।




