Sonbhadra News : कंपनी राज के विरोध में नौजवानों ने भरी हुंकार, रक्तदान कर जल-जंगल-जमीन बचाने का लिया संकल्प
जल, जंगल और जमीन की रक्षा के सवाल को लेकर नौजवान किसान संघर्ष मोर्चा के बैनर तले गुरुवार को बृहद रक्तदान कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान युवाओं ने कंपनी राज के विरोध में आवाज बुलंद......

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9:54 PM, August 14, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । जल, जंगल और जमीन की रक्षा के सवाल को लेकर नौजवान किसान संघर्ष मोर्चा के बैनर तले गुरुवार को बृहद रक्तदान कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान युवाओं ने कंपनी राज के विरोध में आवाज बुलंद करते हुए जनपद के प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि विकास के नाम पर जल, जंगल और जमीन का अंधाधुंध दोहन किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
संघर्ष मोर्चा के संयोजक संदीप मिश्रा ने कहा कि "1858 में ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन के खिलाफ देशवासियों ने संघर्ष किया था, क्योंकि भारत कंपनी राज को स्वीकार नहीं करता था। उन्होंने आरोप लगाया कि आज सोनभद्र में भी कंपनी राज स्थापित करने की कोशिशें दिखाई दे रही हैं, जिसका लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रक्तदान के माध्यम से युवाओं ने अपना संकल्प व्यक्त किया है। जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए जरूरत पड़ी तो सोनभद्र का नौजवान अपने प्राणों की आहुति देने से भी पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने सरकार से जनपद के प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।"
प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए संघर्ष का ऐलान -
सुमन बिन्द ने कहा कि "सोनभद्र की पहचान उसके जंगल, पहाड़ और मेहनतकश लोगों से है। प्राकृतिक संसाधनों के अनियंत्रित दोहन का सीधा असर आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि आंदोलन जनता के अधिकारों और पर्यावरण की रक्षा के लिए है।"
बिन्दु अगरिया ने कहा कि "जल, जंगल और जमीन आदिवासियों एवं ग्रामीणों के जीवन का आधार हैं। इन संसाधनों की रक्षा करना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि इसके लिए लोकतांत्रिक संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।"
वहीं गुलाब चेरो ने कहा कि "सोनभद्र की धरती किसी कंपनी की नहीं बल्कि यहां के लोगों की है। विकास के नाम पर स्थानीय लोगों के अधिकारों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि जनहित के मुद्दों को लेकर संघर्ष लगातार जारी रहेगा।"
कन्हैयालाल धांगर ने कहा कि "रक्तदान कार्यक्रम केवल मानव सेवा का माध्यम नहीं, बल्कि सोनभद्र की अस्मिता और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा का संकल्प भी है। उन्होंने कहा कि जिले के नौजवान पूरी एकजुटता के साथ जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए खड़े हैं।"
कार्यक्रम में वक्ताओं ने सरकार से जनपद के प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय लोगों के हितों को प्राथमिकता देने की मांग की। साथ ही जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक आंदोलन को और व्यापक बनाने का आह्वान किया गया।




