Sonbhadra News : जल, जंगल, जमीन की रक्षा को युवा हुए लामबंद, बोले- हर कीमत पर बचाएंगे मातृभूमि
नौजवान संघर्ष मोर्चा के बैनर तले बड़ी संख्या में आदिवासी, किसान और युवा एकजुट होकर कथित रूप से कॉरपोरेट घरानों के लिए प्रस्तावित परियोजनाओं के खिलाफ मैदान में उतर आए हैं। आज बड़ी संख्या में किसान.....

भाजपा कार्यालय पर प्रदर्शन करते किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारी.....
sonbhadra
5:30 PM, June 13, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• भाजपा कार्यालय पहुंच मुहिम के समर्थन के लिए सौंपा ज्ञापन
सोनभद्र । जिले के जंगल, पहाड़ और नदियों को बचाने की लड़ाई अब गांवों से निकलकर जनआंदोलन का रूप लेने लगी है। किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा के बैनर तले बड़ी संख्या में आदिवासी, किसान और युवा एकजुट होकर कथित रूप से कॉरपोरेट घरानों के लिए प्रस्तावित परियोजनाओं के खिलाफ मैदान में उतर आए हैं। आज बड़ी संख्या में किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने भाजपा जिला कार्यालय पहुंच कर जंगल, पहाड़, नदियों को कॉरपोरेट घरानों से बचाने के लिए कार्यालय मंत्री कैलाश तिवारी को ज्ञापन सौंप समर्थन मांगा। वक्ताओं ने कहा कि किसी भी परियोजना को लागू करने से पहले प्रभावित ग्रामीणों और आदिवासी समुदाय की सहमति लेना अनिवार्य किया जाए तथा वनाधिकार कानूनों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा के संयोजक संदीप मिश्र ने कहा कि "पेड़, पानी और पहाड़ किसी के बाप का नहीं, यह सबका है। उन्होंने कहा कि प्रकृति केवल संसाधन नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों की धरोहर है। विकास के नाम पर जंगलों की कटाई और प्राकृतिक संपदाओं का दोहन किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।"
मोर्चा के जिला संयोजक रामसूरत खरवार ने कहा कि "जंगल आदिवासी समाज की पहचान और जीवन का आधार हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "जान दे देंगे, लेकिन जंगल नहीं कटने देंगे।" उन्होंने आरोप लगाया कि विभिन्न निजी ऊर्जा परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर जंगलों और ग्रामीणों की जमीनों को प्रभावित करने की तैयारी की जा रही है, जिससे स्थानीय लोगों के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो सकता है।"
इस दौरान युवाओं ने कहा कि "जिस तरह देश को अंग्रेजी हुकूमत से मुक्त कराने के लिए अमर क्रांतिकारी भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद और अशफाक उल्ला खां जैसे वीरों ने संघर्ष का बिगुल फूंका था, उसी भावना के साथ सोनभद्र के युवा भी अपनी मातृभूमि, जल-जंगल-जमीन और प्राकृतिक विरासत को बचाने के लिए आगे आए हैं। युवाओं ने कहा कि यह सिर्फ जमीन का नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का सवाल है। यदि जंगल और पहाड़ खत्म हो गए तो आदिवासी समाज की संस्कृति, पहचान और जीवन भी खतरे में पड़ जाएगा। उन्होंने कहा कि अपनी धरती और प्रकृति की रक्षा के लिए वे किसी भी लोकतांत्रिक संघर्ष से पीछे नहीं हटेंगे।"
इस अवसर पर रामसूरत खरवार, गुलाब चेरो, दिनेश गोंड, मुरहु गोंड, रामेश्वर पनिका, जीतू माझी, बिंदु खरवार, आकाश चौहान, सत्रुधन बिंद, सूरज कनौजिया, सुजीत विश्वकर्मा, विजय चौहान, सत्यम पाण्डेय, शंकर सोनी, संजय बियार, विजय बिंद सहित सैकड़ों ग्रामीण एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।




