Sonbhadra News : आखिर कब रुकेगा सोनभद्र में ‘मौत का धंधा’? आयुष्मान कार्ड बेअसर, ICU से बाहर कर मरीज को छोड़ा, हंगामा

देश के अति पिछड़े जिले में शामिल जनपद सोनभद्र में स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत एक बार फिर बेनकाब हो गई है। सरकारी योजनाओं के दावों और जमीनी सच्चाई के बीच खाई इतनी गहरी है कि गरीब मरीज इलाज से..........

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9:34 AM, April 28, 2026

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आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । देश के अति पिछड़े जिले में शामिल जनपद सोनभद्र में स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत एक बार फिर बेनकाब हो गई है। सरकारी योजनाओं के दावों और जमीनी सच्चाई के बीच खाई इतनी गहरी है कि गरीब मरीज इलाज से पहले ही सिस्टम के आगे दम तोड़ देते हैं। आयुष्मान योजना का कार्ड जेब में होने के बावजूद अगर अस्पताल में जिंदगी की कीमत तय हो रही हो, तो यह सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि व्यवस्था पर कड़ा प्रहार भी है।

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पंचशील मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल में जांच करती स्वास्थ्य विभाग की जांच टीम.....

अति पिछड़े जिले की पहचान झेल रहे सोनभद्र में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली एक बार फिर उजागर हुई है। रॉबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के छपका स्थित पंचशील मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में इलाज के दौरान 60 वर्षीय रामविलास की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद इलाज के नाम पर लगातार पैसे वसूले गए और असमर्थता जताने पर मरीज को आईसीयू से बाहर कर दिया गया। वहीं सीएमओ के निर्देश पर हॉस्पिटल पहुंची जांच टीम ने बारीकी से सभी अभिलेखों की जांच व बयान दर्ज कर अपनी रिपोर्ट सौंप दी। 

मृतक की बेटी निर्मला ने तहरीर में बताया कि "23 अप्रैल को पेट दर्द की शिकायत पर जांच कराने के बाद 24 अप्रैल को अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां डॉक्टरों ने किडनी और लीवर खराब होने की बात कहकर इलाज महंगा बताया और आयुष्मान कार्ड से इलाज शुरू करने के लिए पहले 50 हजार रुपये जमा कराए। इसके बाद 25 हजार और फिर 50 हजार की मांग की गई। आरोप है कि पैसे न देने पर 26 अप्रैल को मरीज को जबरन आईसीयू से बाहर कर दिया गया। वाराणसी ले जाते समय रास्ते में उनकी मौत हो गई। वहीं उन्होंने आरोप लगाया कि शव लेकर अस्पताल पहुंचने पर उनके साथ मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी दी गई, जिससे आक्रोशित होकर लोगों ने हंगामा किया।"

दूसरी ओर, अस्पताल संचालक पवित मौर्य ने कोतवाली में तहरीर देकर आरोप लगाया कि "कुछ लोगों ने परिजनों को भड़काकर सुनियोजित तरीके से अस्पताल में बवाल, तोड़फोड़ और पत्थरबाजी की। उन्होंने एक व्यक्ति रोहित पर स्टाफ को भड़काने और पैसे मांगने का भी आरोप लगाया है।"

वहीं पूरे मामले पर प्रभारी निरीक्षक रामस्वरूप वर्मा ने बताया कि "डॉ0 अनुपमा मौर्य, अस्पताल संचालक पवित मौर्य और अन्य अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। दोनों पक्षों की तहरीर के आधार पर जांच की जा रही है, जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के अनुसार कार्रवाई होगी।"

सीएमओ डॉ0 पंकज कुमार राय ने कहा कि "डीएम के निर्देश पर एसीएमओ डॉ0 गुलाब शंकर यादव, डिप्टी सीएमओ डॉ0 कीर्ति आजाद बिंद और एमडी फिजिशियन डॉ0 प्रशांत की तीन सदस्यीय टीम से जांच कराई गई है। रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी गई है, रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।"

"ऐसे में सवाल यह है कि अति पिछड़े जिले सोनभद्र में जहां स्वास्थ्य सुविधाएं पहले से ही सीमित हैं, वहां निजी अस्पतालों की कथित मनमानी पर लगाम कौन लगाएगा? आयुष्मान योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजना का लाभ अगर गरीबों तक नहीं पहुंच पा रहा, तो जिम्मेदारी किसकी है? क्या स्वास्थ्य विभाग सिर्फ जांच समितियां बनाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेगा या फिर ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई कर व्यवस्था में सुधार लाया जाएगा? सोनभद्र में यह कोई पहला मामला नहीं है, लेकिन हर बार की तरह अगर कार्रवाई फाइलों में सिमट गई, तो सवाल एक बार फिर जस का तस बना रहेगा कि आखिर गरीब मरीज जाए तो जाए कहां?"

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