Sonbhadra News : सड़क बनी खेत तो ग्रामीणों ने रोप दिया धान, विकास के दावों की खुली पोल
सरकार गांव-गांव विकास की तस्वीर बदलने और बेहतर सड़क व आवागमन की सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे कर रही है, लेकिन बनबहुआर में इन दावों को आईना दिखाती तस्वीर उस वक्त सामने आई, जब ग्रामीणों ने कीचड़ से....

सड़क पर धान की रोपाई कर विरोध करते ग्रामीण.......
sonbhadra
11:16 AM, August 12, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । सरकार गांव-गांव विकास की तस्वीर बदलने और बेहतर सड़क व आवागमन की सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे कर रही है, लेकिन बनबहुआर में इन दावों को आईना दिखाती तस्वीर उस वक्त सामने आई, जब ग्रामीणों ने कीचड़ से लबालब सड़क पर धान रोपकर अनोखे तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया। ग्रामीणों का यह प्रदर्शन बदहाल सड़क व्यवस्था के खिलाफ नाराजगी का प्रतीक ही नहीं, बल्कि उन विकास के दावों पर भी सवाल है, जिनकी असली तस्वीर बरसात में गांव की गलियों में दिखाई देती है।
बनबहुआर में करीब 300 मीटर सड़क बरसात के दिनों में ग्रामीणों के लिए मुसीबत का सबब बन गई है। बनबहुआर और निपनिया के बीच स्थित इस मार्ग पर जलभराव और कीचड़ के कारण आवागमन बेहद मुश्किल हो गया है। सड़क की हालत ऐसी है कि देखकर यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि यह सड़क है या खेत। इसी से नाराज ग्रामीणों ने सड़क पर धान की रोपाई कर जिम्मेदारों को जमीनी हकीकत का आईना दिखाने का प्रयास किया।
ग्रामीणों का सवाल - जब सड़क खेत बन गई तो क्यों न रोपें धान
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से सड़क निर्माण और मरम्मत की मांग की जा रही है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। हर बरसात में स्थिति और बदतर हो जाती है। कीचड़ और पानी के बीच पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है। दोपहिया वाहन फिसलने का खतरा बना रहता है और चारपहिया वाहनों का आवागमन भी प्रभावित होता है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब जिम्मेदारों की अनदेखी से सड़क खेत में तब्दील हो गई है तो उन्होंने भी सड़क पर धान रोपकर बता दिया कि यहां अब सड़क नहीं, खेती हो सकती है।
बच्चों की राह में कीचड़, मरीजों के लिए मुसीबत -
बदहाल सड़क का सबसे ज्यादा असर स्कूली बच्चों और मरीजों पर पड़ रहा है। ग्रामीण कुमारी देवी ने बताया कि "बरसात के दौरान बच्चों को कीचड़ और पानी से होकर स्कूल जाना पड़ता है। वहीं किसी ग्रामीण के बीमार पड़ने पर परेशानी और गंभीर हो जाती है। एंबुलेंस तक गांव के अंदर आसानी से नहीं पहुंच पाती। गंभीर मरीजों को खाट या अन्य साधनों के सहारे मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। ऐसे में किसी आपात स्थिति में यह सड़क बड़ी समस्या बन सकती है।"
जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक गुहार लेकिन नहीं बदली तस्वीर -
स्थानीय निवासी बुधीराम यादव ने बताया कि "ग्रामीण लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग करते आ रहे हैं। कई बार जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका। क्षेत्रीय विधायक के दो बार चुने जाने के बावजूद सड़क की स्थिति जस की तस बनी हुई है। सांसद को भी समस्या से अवगत कराने का दावा ग्रामीणों ने किया, लेकिन कार्यवाही नहीं हुई। चुनाव के समय सड़क विकास के वादे जरूर सुनाई देते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही ग्रामीणों की यह सड़क फिर अपनी बदहाली के हवाले हो जाती है।"
300 मी0 सड़क ने खोल दी विकास की जमीनी हकीकत -
सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के दावे करती है लेकिन बनबहुआर की यह 300 मीटर सड़क उन दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। सवाल यह है कि जब इतने छोटे मार्ग की समस्या वर्षों में दूर नहीं हो सकी तो ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास के दावों की वास्तविकता क्या है? वहीं ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें किसी बड़ी परियोजना की मांग नहीं है। वे सिर्फ इतना चाहते हैं कि गांव को जोड़ने वाली सड़क बारिश में तालाब न बने और बच्चे, बुजुर्ग तथा मरीज सुरक्षित तरीके से आवागमन कर सकें।
जल्द सड़क नहीं बनी तो ग्रामीण करेंगे जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव -
ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल सड़क निर्माण कराने और जलनिकासी की उचित व्यवस्था किए जाने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्यवाही नहीं हुई तो वे जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव कर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।




