Sonbhadra News : ज्यादा धर्मान्तरण वाले स्थानों पर विहिप चलाएगी संस्कारशालाएँ - नरसिंह त्रिपाठी
विहिप) अपने स्थापना दिवस के 60 वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व पर पूरे कर लेगी। आज नगर के पीडब्लूडी गेस्ट हॉउस में पत्रकारों से मुख़ातिब होते हुए विश्व हिन्दू परिषद के प्रान्त धर्म प्रसाद प्रमुख नरसिंह.

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7:02 PM, August 25, 2024
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) अपने स्थापना दिवस के 60 वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व पर पूरे कर लेगी। आज नगर के पीडब्लूडी गेस्ट हॉउस में पत्रकारों से मुख़ातिब होते हुए विश्व हिन्दू परिषद के प्रान्त धर्म प्रसाद प्रमुख नरसिंह त्रिपाठी ने विश्व हिंदू परिषद की स्थापना के 60 वर्ष पूर्ण होने पर ध्येय यात्रा का वर्णन किया। हिन्दू परिषद के स्थापना की आधारभूत बिन्दुओं को बताते हुए उन्होंने कहा कि यह संगठन एक मात्र विश्व मे निवासरत् हिन्दु समाज के सुरक्षित संरक्षित व सवंर्धित करने के लिए अवतरित हुआ है। ध्येययात्रा के गौरवशाली 60 वर्ष पूर्ण होने पर परिषद ने हिन्दू समाज से लक्षाधिक कार्यकर्ता बनाने, गांव-गांव तक संगठन तंत्र के विस्तार पर जोर दिया है।
उन्होंने कहा कि जनपद सोनभद्र में जमीन जेहाद, लव जेहाद और धर्मान्तरण पर विशेष कार्य किए जा रहे हैं। पिछले एक वर्षों में लव जेहाद से जुड़े दर्जनों मामले में विश्व हिंदू परिषद ने FIR दर्ज कराया है। वहीं धर्मान्तरण के मामले में सैकड़ों लोगों की घर वापसी करायी गयी है जबकि ज्यादा धर्मान्तरण वाले स्थानों पर इसी वर्ष से संस्कारशालाएं भी चलायी जा रही हैं। वहीं बौद्ध धर्म को भी हिंदू धर्म की ही पूजा पद्धति मानते हुए कहा कि वामपंथियों द्वारा दिग्भ्रमित कर हिन्दुओं को आपस में बाँटने के लिए तमाम तरह के हथकंडे अपनाये जाते हैं लेकिन इसको लेकर भी विश्व हिंदू परिषद बड़ा अभियान चलाएगा।
वहीं विश्व हिंदू परिषद के 60 वर्षीय गौरवशाली ध्येय यात्रा का वृतांत बताते हुए उन्होंने कहा कि पदाधिकारियों ने परिषद के स्थापना काल से लेकर अब तक की उपलब्धियों और कठिन संघर्षो को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि हिन्दू जीवन मूल्यों, परम्पराओं, मान बिन्दुओं के प्रति श्रद्धा रखने वाली विश्व के कल्याण के लिए अजेय हिन्दू शक्ति तैयार करने के लिए श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व पर वर्ष 1964 में स्वामी चिन्मयानंद के आश्रम पवई मुम्बई में परिषद की स्थापना की गई। वर्ष 1966 तीर्थराज प्रयागराज के महाकुम्भ में परिषद की ओर से आयोजित प्रथम विश्व हिन्दू सम्मेलन सबसे विराट एकत्रीकरण था। 1969 उडूपी कर्नाटक में हिन्दू सम्मेलन, मंच पर संतों के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर 'गुरूजी' की भी मौजूदगी रही। 1979 में तीर्थराज प्रयाग में संगम तट पर आयोजित द्वितीय विश्व हिन्दू सम्मेलन में देश-विदेश के प्रतिनिधियों ने भागीदारी की।




