Sonbhadra News : भ्रष्टाचार के घेरे में एनआरएलएम योजना, रिश्वतखोरी और मानदेय रोकने के आरोप में समूह सखियों का हंगामा
ब्लॉक घोरावल के शाहगंज क्षेत्र में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत चल रही योजनाओं में भ्रष्टाचार और अनियमितता के गंभीर आरोप सामने आए हैं। समूह सखियों ने ब्लॉक मिशन प्रबंधक और उनकी....

NRLM योजना में भ्रष्टाचार का आरोप लगा हंगामा करती समूह सखियां.....
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6:19 PM, April 5, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । ब्लॉक घोरावल के शाहगंज क्षेत्र में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत चल रही योजनाओं में भ्रष्टाचार और अनियमितता के गंभीर आरोप सामने आए हैं। समूह सखियों ने ब्लॉक मिशन प्रबंधक और उनकी सहयोगी पर अवैध धन उगाही, मानदेय रोकने और ब्लैंक चेक पर हस्ताक्षर कराने जैसे आरोप लगाते हुए हंगामा किया और मामले की जांच की मांग की।
शनिवार को विकास खंड घोरावल अंतर्गत शाहगंज स्थित बुद्धा स्वयं सहायता समूह के कार्यालय पर पहुंचीं कई समूह सखियों ने आरोप लगाया कि उनसे डीसी एनआरएलएम के नाम पर रिश्वत मांगी जाती है। विरोध करने पर मानदेय रोकने और नौकरी से हटाने की धमकी दी जाती है। महिलाओं ने बताया कि उनसे जबरन ब्लैंक चेक पर हस्ताक्षर भी कराए जाते हैं, जबकि उन्हें यह तक नहीं बताया जाता कि पैसा किस काम के लिए निकाला जा रहा है।
समूह की अध्यक्ष ममता व सचिव बिंदु विश्वकर्मा ने बताया कि "ब्लॉक स्तर पर कार्यरत एक महिला द्वारा कई बार उनसे ब्लैंक चेक पर साइन कराए गए, जबकि यह नहीं बताया गया कि चेक किस उद्देश्य से भरे जाएंगे। उन्होंने कहा कि समूह के खाते से निकाले गए पैसों की जानकारी भी उन्हें नहीं दी जाती साथ ही उन्होंने बताया कि समूह सखियों को जो नोटिस जारी की गई है उस पर भी उनके फर्जी हस्ताक्षर बनाए गए हैं।"
समूह सखी श्वेता गिरी ने बताया कि "पिछले कई वर्षों से ड्राई राशन के परिवहन का भाड़ा नहीं मिला है और पिछले नौ महीने से मानदेय भी लंबित है। अधिकारियों से पूछने पर उन्हें यही बताया जाता है कि शासन स्तर से पैसा नहीं आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खाते में ड्राई राशन का 1.44 लाख रुपए आए थे जिसे बीके पूजा द्वारा डीसी के नाम पर 50 हजार रुपये तक की मांग की गई और दबाव बनाकर पैसे लिए गए।"
समूह सखी संतरा देवी ने बताया कि "वह वर्ष 2021 से समूह से जुड़ी हैं और कई बार प्रशिक्षण के लिए मिर्जापुर भी जा चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें मेहनत के अनुसार भुगतान नहीं मिला। वहीं श्यामा देवी ने आरोप लगाया कि पांच साल से काम करने के बावजूद उन्हें न तो मानदेय मिला और न ही ड्राई राशन का पैसा। उन्होंने मांग की कि संबंधित अधिकारियों को हटाकर मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।"
सोनी नाम की एक अन्य समूह सखी ने बताया कि "उनके खाते में करीब 1.92 लाख रुपये आए, लेकिन उन्हें मात्र 40–45 हजार रुपये ही दिए गए और बाकी पैसे के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।"
समूह सखी सुनीता ने भी भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि "मानदेय बढ़ाने के नाम पर कमीशन की मांग की जाती है। वर्तमान में करीब 30 समूह सखियां कार्यरत हैं और सभी को मानदेय व अन्य भुगतान में अनियमितता का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी से मुलाकात न होने पर उन्होंने सीडीओ से शिकायत की, जिन्होंने एक सप्ताह में जांच का आश्वासन दिया था, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।"
समूह सखियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि "यदि जल्द ही उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ और बकाया भुगतान नहीं मिला, तो वे लखनऊ तक जाकर आंदोलन करने को मजबूर होंगी।"
वहीं इस मामले में लगे आरोपों को ब्लॉक मिशन प्रबंधक प्रदीप कुमार ने सिरे से खारिज करते हुए कहा कि "उनके कार्य पूरी तरह पारदर्शी हैं और कोई भी जांच कर सकता है। उन्होंने बताया कि राशन और मानदेय का पैसा सीधे बैंक के माध्यम से आता है और पिछले नौ महीनों से शासन स्तर से ही मानदेय नहीं आया है।"
इसी तरह बीके पूजा ने भी आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि "कुछ चेक तकनीकी कारणों से दोबारा भरवाए गए थे, इसलिए ब्लैंक चेक पर हस्ताक्षर कराए गए। उनका कहना है कि समूह सखियों को मिलने वाला पैसा सीधे उनके खातों में जाता है और किसी भी प्रकार की अवैध वसूली नहीं की गई है।"




