वहीं पिपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज के राष्ट्रीय काउंसिल सदस्य विकास शाक्य ने बताया कि "सुनील उर्फ संजय कोल को हार्डकोर इनामी नक्सली बताकर चंदौली पुलिस ने अप्रैल 2007 में एनकाउंटर कर दिया था, उसके पश्चात सुनील उर्फ संजय कोल की पत्नी सुषमा कोल को भी कई संदिग्ध मामले में नक्सली बताते हुए विभिन्न मुकदमे में जेल में बंद कर रखा गया। मुकदमें के ट्रायल और न्यायिक कार्रवाई के लंबे प्रक्रिया के 13 वर्षों बाद छूट कर वापस घर आयी और अपनी गृहस्थी बसाई। माइक्रोफाइनेंस वालों के जबरन वसूली पर हुए विवाद में सुषमा द्वारा प्रोटेस्ट करने पर माइक्रोफाइनेंस वालों के पक्ष में सुकृत चौकी पुलिस कोतवाली रॉबर्ट्सगंज पुलिस सक्रिय हुई, पुलिस की सक्रियता के पीछे माइक्रो फाइनेंस कंपनी था, परंतु सामने जमीनी विवाद था। यह जमीनी विवाद रवि, राधा देवी,शंकर सोनी तथा मृतक सुनील तथा सुभाष के बीच रास्ता नाली बनाने के विवाद में संज्ञेय अथवा असंज्ञेय अपराध होने की संभावना पर रॉबर्ट्सगंज कोतवाली के सुकृत चौकी पुलिस ने धारा 126/135 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में कार्रवाई करके रिपोर्ट उप जिला मजिस्ट्रेट के न्यायालय में 6 फरवरी 2025 को भेज दिया। न्यायालय ने पुलिस के रिपोर्ट पर संज्ञान लेकर मृतक सुनील को भी उपस्थित होने का संबंध नोटिस भेज दिया। पुलिस ने मृतक की उपस्थिति के लिए मृतक के पत्नी को सम्मन प्राप्त कराया। मृतक के पत्नी सुषमा परेशान होकर न्यायालय में संपूर्ण दस्तावेज के साथ न्याय की गुहार लगाई है।"