सोनभद्र । सरकार जहां एक ओर विकास का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर आपदाग्रस्त राजस्व गांव चकरिया की यह तस्वीर इस दावे को आइना दिखाती नजर आती है। बरसात आई नहीं कि चकरिया टोला कुसुमदाहा के ग्रामीणों की धड़कनें तेज हो जाती हैं। सोन नदी से जुडा परना दरी ज़ब बारिश में उफनाता है तो लोग जान हथेली पर रखकर उसे पार करते हैं। जहाँ स्कूली बच्चे लहरों से लड़कर स्कूल जाते हैं वहीं बुजुर्ग, बीमार और गर्भवती महिलाएं हर कोई लहरों से आंख मिलाकर अपनी मंजिल तक पहुंचने की कोशिश करता है। हर साल बारिश में यहीं होता है। छलके में पानी चढ़ जाती है, पुल नहीं है, बच्चे स्कूल नहीं जा पाते और शिक्षा की बुनियाद कमजोर होती जाती है। कई बार प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधियों तक, सभी से पुल निर्माण की मांग की गई, लेकिन आज तक केवल वादे हुए, काम नहीं। अब जब भी बारिश आती है, गांव वाले मजबूरन इसी तरह बच्चों को स्कूल भेजते हैं।