Sonbhadra News : दुर्गाभूषण उपवन में तीन दिवसीय रामोत्सव कार्यक्रम संपन्न
गुप्तकाशी विकास परिषद उत्तर प्रदेश तथा उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान लखनऊ (संस्कृति विभाग,उ0प्र0) के संयुक्त तत्वाधान में तीन दिवसीय रामोत्सव का आयोजन धर्मग्राम नाको के दुर्गाभूषण......

sonbhadra
2:58 PM, March 18, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । गुप्तकाशी विकास परिषद उत्तर प्रदेश तथा उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान लखनऊ (संस्कृति विभाग,उ0प्र0) के संयुक्त तत्वाधान में तीन दिवसीय रामोत्सव का आयोजन धर्मग्राम नाको के दुर्गाभूषण उपवन में किया गया। संपूर्ण कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत के विख्यात साहित्यकार पंडित पारसनाथ मिश्र एवं अध्यक्षता राष्ट्रीय कवि पंडित जगदीश पंथी ने किया। विधायक सदर भूपेश चौबे के संरक्षकत्व में कार्यक्रम का संचालन गुप्त काशी विकास परिषद के अध्यक्ष पं0 आलोक कुमार चतुर्वेदी व साहित्यकार अजय चतुर्वेदी कक्का ने किया। वहीं रामोत्सव कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान लखनऊ के कलाकार पंडित ओमप्रकाश मिश्रा की टीम द्वारा पूजनोत्सव पश्चात चौबीस घंटे अखंड रामायण पाठ से प्रारंभ हुआ। तत्पश्चात संस्थान द्वारा भेजे गए कलाकार शुभम त्रिपाठी की टीम ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। अंतिम चरण में राष्ट्रीय कवि जगदीश पंथी की टीम ने काव्य गोष्ठी में कविता पाठ किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पं0 पारसनाथ मिश्र साहित्यकार ने कहा कि "राम स्वयं एक जीवन दृष्टि हैं। वह अपनी कृपा-दृष्टि भर से सब कुछ सही कर देने का दावा नहीं करते, बल्कि अपने मर्यादित पौरुष से सब कुछ संभालने की कला सिखाते हैं. स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि ‘अगर ईश्वर मनुष्य बन सकता है तो किसी दिन मनुष्य भी अवश्य ही ईश्वर बनेगा।‘ श्रीराम इसी सपने के आधार बिंदु हैं. राम का चरित्र साधनहीन साधारण पद्धतियों का असाधारण आत्मविश्वास है। राम इस बात के प्रतीक हैं कि सोने के क़िले और प्रकृति-पुत्रों के बीच युद्ध में सदा जनवर्ग ही जीतता है। रामकथा के प्रतीक-शास्त्र के अनुसार अयोध्या शांति का प्रतीक है, किष्किन्धा प्रकृति से सहकार का प्रतीक है और लंका परम वैभव का प्रतीक है। रामकथा यह बताती है कि शांति द्वारा परम वैभव को भी प्रकृति के साहचर्य के सहारे बड़ी सहजता से पराजित किया जा सकता है।
कार्यक्रम के संरक्षक सदर विधायक भूपेश चौबे ने कहा कि "राम का पूरा सैन्यबल लोक कौशल का अद्भुत संग्रह है. युद्ध राम का है, लेकिन एक मामूली वानर भी रावण को पराजित करने के लिए नख और दांतों के सहारे भिड़ा है। विश्व के सबसे बड़े योद्धा को पराजित करने के लिए राम पड़ोसी राजाओं की मदद लेने के बजाय वंचितों और वनवासियों पर भरोसा करते हैं। राम की सबसे बड़ी विशेषता यह भी है कि वे कहीं भी अति चमत्कारिक नजर नहीं आते। वे मानवीय भावनाओं से लड़ने के बजाय उनका सम्मान करना सिखाते हैं।"
कार्यक्रम के अध्यक्ष जगदीश पंथी कवि ने कहा कि "राम आराध्य भी हैं और आराधना भी, राम साध्य भी हैं और साधना भी!राम मानस भी हैं और गीता भी, राम राम भी हैं और सीता भी, राम धारणा भी हैं और धर्म भी, राम कारण भी हैं और कर्म भी, राम युग भी हैं और पल भी, राम आज भी हैं और कल भी, राम गृहस्थ भी हैं और संत भी, राम आदि भी हैं और अंत भी।"
संचालक अध्यक्ष गुप्त काशी विकास परिषद पं0 आलोक कुमार चतुर्वेदी व अजय चतुर्वेदी कक्का ने एकस्वर में कहा कि "भगवान राम की विशिष्टता उनके शांत स्वभाव, मजबूत नैतिक मूल्यों और प्रजा के प्रति प्रेम में निहित है। रावण पर उनकी विजय यह दर्शाती है कि बुराई पर अच्छाई की हमेशा जीत होती है।"
कार्यक्रम में गुप्त काशी विकास परिषद के संरक्षक लालजी त्रिपाठी, डॉ0 अवधेश दीक्षित, संजय शुक्ला, दयाशंकर पांडेय, मधुकर पांडेय, कुंवर चतुर्वेदी, प्रकाश चंद त्रिपाठी, अशोक तिवारी, कवि प्रेम पावस, दिवाकर द्विवेदी मेघ, ईश्वर विरागी, प्रमोद कुमार, सुनील दुबे सहित सैकड़ो लोग कार्यक्रम में उपस्थित रहे।



