Sonbhadra News : फिर निभाई गई संपूर्ण समाधान दिवस की औपचारिकता? 218 शिकायतों में सिर्फ 12 का निस्तारण
शासन की मंशा के अनुरूप आयोजित किए जाने वाले ‘सम्पूर्ण समाधान दिवस’ पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। जिले की चारों तहसीलों में आयोजित इस कार्यक्रम में कुल 218 शिकायतें आईं, लेकिन मौके पर सिर्फ 12....

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7:01 PM, April 18, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । शासन की मंशा के अनुरूप आयोजित किए जाने वाले ‘सम्पूर्ण समाधान दिवस’ पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। जिले की चारों तहसीलों में आयोजित इस कार्यक्रम में कुल 218 शिकायतें आईं, लेकिन मौके पर सिर्फ 12 मामलों का ही निस्तारण हो सका। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या समाधान दिवस सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गया है, जहां शिकायतें तो सुनी जाती हैं, लेकिन समाधान अधूरा ही रह जाता है?
सदर तहसील में डीएम-एसपी ने सुनी फरियाद -
रॉबर्ट्सगंज तहसील में जिलाधिकारी बी0एन0 सिंह और पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा ने कुल 79 शिकायतें सुनीं, जिनमें से मात्र 9 का मौके पर निस्तारण किया गया। अधिकतर शिकायतें भूमि विवाद से जुड़ी रहीं, जिनमें टीम भेजकर जांच के निर्देश दिए गए। डीएम ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही आईजीआरएस, थाना दिवस व समाधान दिवस की शिकायतों पर फीडबैक लेने के भी निर्देश दिए गए।
दुद्धी तहसील में 31 शिकायतें, 1 का निस्तारण -
दुद्धी तहसील में उप जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित समाधान दिवस में 31 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से सिर्फ 1 का मौके पर समाधान हो सका। बाकी मामलों को जांच के लिए टीम को सौंपा गया।
घोरावल तहसील में आई 60 शिकायतें -
घोरावल तहसील में अपर जिलाधिकारी (वित्त/राजस्व) वागीश कुमार शुक्ला की अध्यक्षता में 60 शिकायतें सुनी गईं। सभी मामलों को समयबद्ध निस्तारण के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया।
तहसील ओबरा में 48 शिकायतें, मात्र 2 का समाधान -
ओबरा तहसील में उप जिलाधिकारी विवेक कुमार सिंह की अध्यक्षता में 48 शिकायतें आईं, जिनमें से केवल 2 का मौके पर निस्तारण किया गया, जबकि बाकी मामलों में कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
कुल आंकड़े -
कुल शिकायतें - 218
मौके पर निस्तारित - 12
लंबित/निर्देशित - 206
सवाल बरकरार -
आंकड़े खुद गवाही दे रहे हैं कि सम्पूर्ण समाधान दिवस का मकसद अभी कागज़ों से ज़मीन तक पूरी तरह नहीं उतर पाया है। सैकड़ों शिकायतें दर्ज होना और मौके पर गिनती भर निस्तारण, व्यवस्था की सुस्त रफ्तार और औपचारिकता को उजागर करता है। यदि यहीं हाल रहा तो यह मंच महज़ सुनवाई दिवस बनकर रह जाएगा, जबकि जनता को त्वरित और ठोस समाधान की दरकार है। ऐसे में अब जिम्मेदार अधिकारियों के सामने चुनौती साफ है कि व्यवस्था को दिखावे से निकालकर परिणाम तक पहुंचाना होगा, वरना भरोसे का यह मंच धीरे-धीरे अपनी अहमियत खोता चला जाएगा।




