Sonbhadra News : जीरो टॉलरेंस का सच आया सामने, टेंडर खुलने के पहले हो गया काम
लोगों के बीच चर्चा होने लगी कि नगर पंचायत चोपन में भ्रष्टाचार इतना बढ़ गया है कि टेंडर खुलने के पहले ही कई काम खत्म हो गए जबकि कई जगहों पर काम लगा हुआ है।

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10:08 AM, October 5, 2026
- चोपन नगर पंचायत का मामला
- चेयरमैन बोले- रद्द कर दिया गया है टेंडर
- बड़ा सवाल- आखिर कराये गए काम का क्या होगा, क्या श्रमदान घोषित होगा
शांतनु कुमार/घनश्याम पाण्डेय
चोपन (सोनभद्र)। जीरो टॉलरेंस की सरकार में काम कैसे होते हैं, चोपन नगर पंचायत के इस प्रकाशित टेंडर को देखकर आपको भी समझ में आ जायेगा।
चोपन नगर पंचायत कार्यालय से एक अल्पकालीन टेंडर 25 सितंबर 2026 को पत्रांक संख्या 414 से निकाला गया। अल्पकालीन टेंडर में कुल 9 कामों को दर्शाया गया है। अधिशाषी अधिकारी और चेयरमैन की सहमति से निकाला गया यह टेंडर खुलने से पहले ही चर्चाओं में है और सवाल खड़े होने शुरू हो गए हैं।
लोगों के बीच चर्चा होने लगी कि नगर पंचायत चोपन में भ्रष्टाचार इतना बढ़ गया है कि टेंडर खुलने के पहले ही कई काम खत्म हो गए जबकि कई जगहों पर काम लगा हुआ है।
नगर पंचायत चोपन में अधिशासी अधिकारी आवास परिषद में स्टोर रूम का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है और वार्ड नंबर 6 में अवकाश नगर में ट्रांसफार्मर से डॉक्टर बृजेश सिंह के घर तक आरसीसी नाली निर्माण का कार्य में गड्ढा खोदने का काम शुरू हो गया है ।
वहीं वार्ड नंबर 6/12 में वाराणसी-शक्ति नगर मार्ग से अजय बहादुर सिंह के टावर तक रंगीन इंटरलॉकिंग व नाली का निर्माण कार्य भी लगभग खत्म हो चुका है।
चर्चाओं का दौर शुरू हुआ तो विभाग खुद को फंसता देख 3 अक्टूबर को टेंडर निरस्त कर दिया।
वहीं इस मामले में ईओ को फोन किया गया तो उनका फोन नहीं उठा जबकि चेयरमैन उस्मान अली ने बताया कि टेंडर को रद्द कर दिया गया है। लेकिन जब उनसे पूछा गया कि आखिर कराये गए काम का क्या होगा, क्या वह श्रमदान घोषित होगा, तो उन्होंने बताया कि वे बाहर थे अभी वे निरीक्षण नहीं किये हैं, निरीक्षण करने के बाद आगे कार्यवाही की जायेगी।
ऐसे में बड़ा सवाल यही से शुरू होता है कि जब विभाग ने टेंडर 25 सितंबर 2026 को निकाला और टेंडर खुलने की तिथि 9 अक्टूबर है, और वह भी जिलाधिकारी कार्यालय में, तो आखिर टेंडर खुलने के पहले कई काम कैसे हो गए और कई जगहों पर काम लगा हुआ है। आखिर ठेकेदार को कैसे पता कि यह काम उसे ही मिलने वाला है, जिसे लेकर उसने काम लगा दिया।
लोगों का कहना है कि जिस तरह से नगर पंचायत चोपन में भ्रष्टाचार खुलकर सामने आ गया है, ऐसे में सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति भी उजागर हो गई है।
बहरहाल निकला हुआ टेंडर भले ही रद्द कर दिया गया हो मगर बड़ा सवाल यह है कि बिना सहमति के ठेकेदार द्वारा कराए गए काम का आखिर होगा क्या ? अब देखने वाली बात यह है कि इस खुलासे के बाद अब जिला प्रशासन इस पर क्या एक्शन लेता है ।




