प्रत्यक्षदर्शी छोटू की माने तो, 15 नवंबर को कुल 19 मजदूर खदान में सुबह 11 बजे से काम कर रहे थे, कई घंटे से मशीनें बिना रुके चल रही थीं। गहराई बढ़ चुकी थी और दीवारों पर दरारें दिखने लगी थीं, लेकिन मजदूरों की चेतावनी को नजरअंदाज कर दिया गया। दोपहर तकरीबन 2 से 2.30 बजे अचानक जोरदार धमाके के साथ खदान का एक बड़ा हिस्सा ढह गया, जिससे खदान के उस हिस्से में अंधेरा छा गया और पल भर में कई मजदूर मलबे के नीचे दब गए। वहाँ सिर्फ धूल का गुबार और मजदूरों के चीखों की आवाजें सुनाई दे रही थी। उसके दो भाई भी उसी मलबे के नीचे दब गए। वह बाथरूम करने बाहर की तरफ गए था इसलिए बच गया, उसने इसकी सुचना तत्काल अपने मालिक को दी। वहाँ पहुंचे मालिक ने गंभीर रूप से घायल तीन मजदूरों को वहाँ से निकाल कर ले गए जबकि अन्य मजदूरों कई टन मलबे के नीचे दबे रहे।