Sonbhadra News : सीएमओ का आदेश ठेंगे पर रखते हैं नामचीन अस्पतालों के संचालक
सेवाओं को मुकम्मल करके हर व्यक्ति को स्वस्थ्य बनाने का स्वास्थ्य महकमा भले ही दावा करता है लेकिन, हकीकत कुछ और ही है। देश के 115 आकांक्षी जिलों में शामिल आदिवासी बाहुल्य जनपद सोनभद्र की 20 लाख की....

sonbhadra
10:55 PM, September 20, 2025
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । स्वास्थ्य सेवाओं को मुकम्मल करके हर व्यक्ति को स्वस्थ्य बनाने का स्वास्थ्य महकमा भले ही दावा करता है लेकिन, हकीकत कुछ और ही है। देश के 115 आकांक्षी जिलों में शामिल आदिवासी बाहुल्य जनपद सोनभद्र की 20 लाख की आबादी आज भी बेहतर इलाज के नाम पर ठगी जा रही है। ना सिर्फ सरकारी हॉस्पिटल बल्कि निजी हॉस्पिटलों में भी मरीजों को सिर्फ व्यापार का माध्यम समझा जाने लगा है। यहीं नहीं जिले के निजी हॉस्पिटलों के बोर्ड पर बड़े-बड़े डॉक्टरों के अंकित नाम से बेहतर इलाज के लिए जाते हैं लेकिन वहाँ बोर्ड पर अंकित एक भी डॉक्टर मौजूद नहीं मिलता। यहीं नहीं निजी हॉस्पिटलों में लगातार हो रही मौतों से भी हड़कंप मचा हुआ था। जिले के स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए सीएमओ ने ताबड़तोड़ कार्यवाही शुरू कर दी और मानकों को पूरा नहीं करने वाले कई अस्पतालों पर ताले जड़ दिए गए। सीएमओ ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए खा कि जो मानक पूरा करेगा वो हॉस्पिटल संचालित होगा अन्यथा उस पर ताला जड़ा जायेगा, किसी भी मरीज को मौत के मुंह में नहीं डाला जायेगा।
बैठक में नहीं पहुँचे नामचीन हॉस्पिटल के संचालक -
वहीं सीएमओ डॉ0 अश्वनी कुमार ने गत 15 सितंबर को हॉस्पिटल संचालन के संबंध में समीक्षा बैठक के उद्देश्य से जिले के सभी पंजीकृत निजी हॉस्पिटल संचालकों को अपने नियमित चिकित्सक, सर्जन और एनेस्थेटिक के साथ सम्मिलित होने का निर्देश दिया था साथ ही यह चेतावनी भी दी थी कि यदि उक्त बैठक में कोई भी हॉस्पिटल संचालक शामिल नहीं होता है तो उसके हॉस्पिटल का पंजीयन निरस्त कर दिया जायेगा। वहीं बैठक में तकरीबन 66 हॉस्पिटल के संचालक तो सम्मिलित हुए लेकिन जिले के कई नामचीन हॉस्पिटल संचालकों ने सीएमओ के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए समीक्षा बैठक में शामिल होना जरुरी नहीं समझा। बैठक के इतने दिन बीतने के बाद भी उन हॉस्पिटल संचालकों के विरुद्ध कोई नोटिस नहीं जारी करने से स्वास्थ्य विभाग अब खुद सवालों के घेरे में आ गया है।
वहीं नाम न छापने की शर्त पर बैठक में शामिल कुछ हॉस्पिटल संचालकों ने बताया कि जनपद सोनभद्र में निजी हॉस्पिटल का संचालक दो तरीके के होते हैं एक वो जिन्हें स्वास्थ्य विभाग की विशेष छाया प्राप्त होती है तथा दूसरे वो जिन पर विभाग के सारे मानक और नियम लागू होते हैं।




