Sonbhadra News : खनन विभाग और व्यापारियों का खेला उजागर, पढ़िये कैसे योगी सरकार को लगा दिये करोड़ों का चूना
खनन में व्याप्त भ्रष्टाचार को देखते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने यह विभाग अपने पास रखा है लेकिन भ्रष्ट तंत्र और मजबूत सिंडिकेट ने इस विभाग को दीमक की तरह खोखला कर दिया है।

sonbhadra
9:00 AM, June 7, 2026
शांतनु कुमार
० पोस्ट मानसून रिपेस्नेमेंट स्टडी रिपोर्ट में अंकित मात्रा से अधिक बालू निकालने की मिली अनुमति
० खनन विभाग ने मिलकर करवा दिया अवैध खनन एवं परिवहन
सोनभद्र । सरकार चाहे किसी की हो खनन विभाग और व्यवसायियों का सिंडिकेट हमेशा से मजबूत माना जाता रहा है। खनन में व्याप्त भ्रष्टाचार को देखते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने यह विभाग अपने पास रखा है लेकिन भ्रष्ट तंत्र और मजबूत सिंडिकेट ने इस विभाग को दीमक की तरह खोखला कर दिया है।
ताजा मामला जनपद सोनभद्र खनन विभाग का है, जहाँ खनन विभाग और व्यापारी मिलकर सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगा दिये और किसी को खबर तक नहीं हुई।
बताया जा रहा है कि सोनभद्र रेणु नदी क्षेत्र में आर.के. ट्रांसपोर्ट एंड कंस्ट्रक्शन्स लिमिटेड का बालू/मोरम का लीज है।
नियमानुसार मानसून सत्र में खनन कार्य बंद रहता है, जिसके बाद लीज धारक को पोस्ट मानसून रीप्लेस्नेमेंट स्टडी रिपोर्ट शासन-प्रशासन को भेजना पड़ता है। उसी के तहत 3 नवम्बर 2025 में आर.के. ट्रांसपोर्ट एंड कंस्ट्रक्शन्स लिमिटेड ने भी जिलाधिकारी को अपनी रिपोर्ट भेजी।
आर.के. ट्रांसपोर्ट एंड कंस्ट्रक्शन्स लिमिटेड ने अपनी रिपोर्ट में जिलाधिकारी को बताया कि खेवंधा गांव में आराजी संख्या 246 (खंड-द) में रेणु नदी के किनारे 6 हेक्टेयर क्षेत्र की बालू/मोरम खनन लीज उसे आवंटित की गई थी। लीज धारक ने पोस्ट मानसून रीप्लेस्नेमेंट स्टडी रिपोर्ट में बताया कि कुल 6 हेक्टेयर में से मात्र 1.218 हेक्टेयर क्षेत्र ही खनन योग्य है, जिसमें केवल 32,886 घन मीटर बालू उपलब्ध है। अतः उन्हें 32,886 घन मीटर बालू खनन करने की अनुमति दी जाय।
बताया जाता है कि जब रिपोर्ट की कॉपी खनन विभाग पहुंची तो विभाग ने एक ऐसे खेल को रचा जिससे व्यापारी और विभाग को करोड़ों रुपये का फायदा होने वाला था ।
बस फिर क्या खनन विभाग व्यापारी के साथ मिलकर नियमों ताख पर रखते हुए कंपनी को 90,000 घन मीटर बालू खनन की अनुमति दे दी।आरोप है कि कंपनी ने जनवरी 2026 से मई 2026 तक 64,000 घन मीटर (MM-11) का शुल्क जमा कर लगभग 56,111 घन मीटर बालू का परिवहन कर लिया है, जो पोस्ट मानसून रीप्लेस्नेमेंट स्टडी रिपोर्ट में आकलित मात्रा से कहीं अधिक है।
खनन से जुड़े जानकारों का मानना है कि पर्यावरण क्लियरेंस की आड़ में रीप्लेस्नेमेंट स्टडी रिपोर्ट को दरकिनार कर खनन विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से यह खेल खेला गया।
यहाँ सवाल यह उठता है कि जब कंपनी के पास केवल 32,886 घन मीटर की ही खनन योग्य मात्रा उपलब्ध थी, तो विभाग ने 90,000 घन मीटर की अनुमति कैसे दे दी। जानकारों का कहना है कि सरकार को इसकी उच्चस्तरीय जांच करानी चाहिए। ताकि करोड़ों रुपये की राजस्व क्षति की पूर्ति हो सके। साथ ही ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्यवाही होनी चाहिए जो सीएम योगी के साथ सरकार की छवि को धूमिल कर रहे हैं।




