Sonbhadra News : टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों ने भरी हुंकार, कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर सौंपा ज्ञापन
शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्यता किए जाने को लेकर प्रदेश भर के शिक्षकों में रोष है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के विरोध में आज जनपद के सैकड़ों माध्यमिक शिक्षक-शिक्षिकाओं ने जिलाधिकारी के.....

कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन करते शिक्षकगण.....
sonbhadra
4:07 PM, September 11, 2025
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्यता किए जाने को लेकर प्रदेश भर के शिक्षकों में रोष है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के विरोध में आज उत्तर प्रादेशिय माध्यमिक शिक्षक संघ के बैनर तले जनपद के सैकड़ों शिक्षक-शिक्षिकाओं ने जिलाधिकारी के माध्यम से केंद्र सरकार को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा। शिक्षकों ने मांग किया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम में संशोधन कर पुराने शिक्षकों को टीईटी उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता से मुक्त किया जाए। अन्यथा लाखों शिक्षक-शिक्षिकाओं की नौकरी व प्रोन्नति पर संकट बना रहेगा।
इस दौरान उत्तर प्रदेश के माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष रवि भूषण सिंह ने बताया कि "शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना कभी भी अनिवार्य नहीं रहा था। न ही इस संबंध में भारत सरकार अथवा किसी राज्य सरकार द्वारा कोई दिशा-निर्देश या आदेश जारी किया गया था। हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एक आदेश पारित कर यह कहा गया है कि देश में शिक्षक बने रहने के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। जिन शिक्षकों की सेवा अवधि केवल पांच वर्ष शेष है, उन्हें इस अनिवार्यता से छूट दी गई है, परंतु ऐसे शिक्षक भी प्रोन्नति के लिए पात्र नहीं रहेंगे।"
वहीं उत्तर प्रदेश की प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष योगेश कुमार पांडेय ने बताया कि "शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता नहीं थी, लेकिन हाल ही में गलत तथ्यों के आधार पर इससे संबंधित आदेश जारी किया गया है। नए निर्देशों में शिक्षक बने रहने के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया गया है। इसमें केवल पांच साल की सेवा शेष रहने वालों को छूट दी गई है, जबकि पदोन्नति में उन्हें भी छूट नहीं दी गई है। उन्होंने बताया कि इस आदेश से प्रदेश के करीब आठ लाख शिक्षकों की नौकरी और पदोन्नति पर संकट गहराने लगा है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या IAS/IPS या अन्य अधिकारी या कर्मचारी दोबारा सिविल सेवा की परीक्षा देंगे? सरकार शिक्षकों के साथ दोहरा व्यवहार कर रही है और शिक्षक इसको लेकर चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने मांग किया कि अधिनियम में संशोधन कर शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त किया जाए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर मांग पूरी नहीं हुई तो प्रदेश और राष्ट्रीय नेतृत्व के आह्वान पर शिक्षक समाज बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होगा।"
इस दौरान जिला महामंत्री धीरेंद्र पति तिवारी, मंडल उपाध्यक्ष कमलेश सिंह, यूटा जिलाध्यक्ष शिवम अग्रवाल, पटेवा प्रदेश उपाध्यक्ष रंजना सिंह, अटेवा जिलाध्यक्ष राज मौर्य, संतोष कुमारी, मायाकांत शर्मा, अनिला सिंह, सुनील शर्मा, गलर राम, इंदु प्रकाश सिंह, प्रदीप सिंह, अवधेश कनौजिया, रामगोपाल यादव, नीतू सिंह, सुनीता राय, उमा सिंह पटेल, अर्चना राय, सुनीता राय, तबस्सुम, संगीता, अन्नू सिंह, अभिलाषा सहित बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहे।




